हत्या मामले में गवाह की गवाही के बीच 19 महीने की देरी पर राजस्थान हाईकोर्ट ने जताई 'सिस्टमेटिक फ्रॉड' की आशंका

Praveen Mishra

10 Aug 2026 2:41 PM IST

  • हत्या मामले में गवाह की गवाही के बीच 19 महीने की देरी पर राजस्थान हाईकोर्ट ने जताई सिस्टमेटिक फ्रॉड की आशंका

    जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट ने हत्या के एक मामले में मुख्य गवाह के बयान और जिरह के बीच करीब दो साल की देरी को लेकर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने आशंका जताई कि इस देरी के जरिए आपराधिक न्याय व्यवस्था के साथ “सिस्टमेटिक फ्रॉड” किया गया हो सकता है।

    जस्टिस अशोक कुमार जैन ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए ट्रायल कोर्ट के कामकाज की जांच के लिए रजिस्ट्रार (विजिलेंस) को रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। साथ ही, प्रिंसिपल सेक्रेटरी, लॉ एंड लीगल अफेयर्स को संबंधित अतिरिक्त लोक अभियोजक (Additional PP) से स्पष्टीकरण मांगकर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को कहा।

    मामले में PW-8 ने सितंबर 2024 में मुख्य परीक्षा के दौरान खुद को घटना का चश्मदीद गवाह बताया था। इसके बाद आरोपी अदालत में मौजूद नहीं होने के आधार पर उसकी जिरह टाल दी गई। आखिरकार अप्रैल 2026 में उसकी जिरह हुई, जिसमें उसने अपना बयान बदलते हुए चश्मदीद होने से ही इनकार कर दिया।

    हाईकोर्ट ने कहा कि मुख्य परीक्षा और जिरह के बीच इतना लंबा अंतराल गवाह को प्रभावित करने या अपने पक्ष में करने के लिए पर्याप्त था। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि अप्रैल 2026 में भी आरोपी मौजूद नहीं थे, लेकिन अभियोजन पक्ष ने कोई आपत्ति नहीं जताई और गवाह का बयान पूरा कर दिया गया।

    कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और अभियोजन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि गवाह के बदले हुए बयान के बाद उसे Hostile Witness घोषित कर दोबारा पूछताछ की जानी चाहिए थी। ट्रायल कोर्ट के पास भी परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए सवाल पूछने की शक्ति थी।

    कोर्ट ने कहा कि मामले की परिस्थितियां इस आशंका की ओर इशारा करती हैं कि आपराधिक न्याय व्यवस्था के साथ धोखाधड़ी की गई हो सकती है।

    जस्टिस अशोक कुमार जैन ने गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा, “जब व्यवस्था के शीर्ष पर बैठे लोग ही व्यवस्था को नष्ट करने में लगे हों, तो सिस्टम की रक्षा करने वाला कोई नहीं बचता।”

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

    Next Story