हर आरोपी की गरिमा का सम्मान ज़रूरी, राज्य अंडे फेंकने और भीड़ की हिंसा को रोके: कलकत्ता हाईकोर्ट
Shahadat
2 July 2026 9:43 AM IST

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया कि वह तुरंत पूरे राज्य में ऐसी गाइडलाइंस जारी करें, जिनसे आम लोगों को आरोपियों पर अंडे फेंकने, भीड़ की हिंसा या लिंचिंग में शामिल होने से रोका जा सके। कोर्ट ने कहा कि संविधान के तहत हर आरोपी को गरिमा और सुरक्षा का अधिकार है।
एक्टिंग चीफ जस्टिस तापब्रत चक्रवर्ती और जस्टिस पार्थ सारथी चटर्जी की खंडपीठ ने जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए। इस याचिका में एक खास राजनीतिक दल से जुड़े लोगों के खिलाफ लक्षित सार्वजनिक हिंसा, भीड़ के हमलों और सार्वजनिक अपमान का आरोप लगाया गया।
यह PIL मोहम्मद दानिश फारूकी ने दायर की। याचिकाकर्ता की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट कल्याण बंदोपाध्याय ने तर्क दिया कि आरोपियों पर हमले, लक्षित हिंसा और सार्वजनिक अपमान की कई शिकायतों के बावजूद, राज्य के अधिकारियों ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
याचिका में राज्य को निर्देश देने की मांग की गई कि वह ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ-साथ आम लोगों पर अंडे फेंकने से लोगों को रोके; ऐसी हरकतें करने वालों के खिलाफ स्वतः संज्ञान (suo motu) लेते हुए शिकायतें दर्ज करे; भीड़ की हिंसा और अत्याचारों को रोके; और यह सुनिश्चित करे कि हिरासत में लिए गए लोगों को हथकड़ी न लगाई जाए, कमर पर रस्सी न बांधी जाए या उन्हें हाफ-पैंट और चप्पल में इस तरह न घुमाया जाए, जिससे उनका अपमान हो।
रिट याचिका में दिए गए खास बयानों का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि पुलिस में शिकायतें दर्ज होने के बावजूद भीड़ द्वारा लिंचिंग और हमलों की घटनाएं हुईं, जिनमें गर्भवती महिलाओं पर हमले भी शामिल हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों - ज़ुल्फ़िकार हल्दर बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, इन री: मनोज टिबरेवाल आकाश और इन री: सिटी हाउंडेड बाय स्ट्रेज़, किड्स पे प्राइस - का हवाला दिया।
राज्य की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने कहा कि जहां भी खास शिकायतें दर्ज की गई थीं, वहां FIR पहले ही दर्ज कर ली गई हैं और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने कोर्ट के सामने संबंधित रिकॉर्ड पेश करने के लिए समय मांगा।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि PIL में लगाए गए आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने कहा,
"पहली नज़र में, दर्ज की गई शिकायतों को रोज़मर्रा की मामूली घटना मानकर नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता; बल्कि उनकी बुनियादी नज़रिए से जाँच होनी चाहिए। मानवीय गरिमा की गारंटी, जो हमारे संवैधानिक कल्चर का हिस्सा है, और भारत के संविधान के आर्टिकल 14, 19 और 21 के प्रावधान तब लागू होते हैं जब हमें एहसास होता है कि किसी इंसान को अमानवीय समझना अनुचित और मनमाना है।"
इस बात पर ज़ोर देते हुए कि संवैधानिक सुरक्षा अपराध के आरोपी लोगों को भी मिलती है, बेंच ने कहा:
"कानून जो गरिमा और सुरक्षा देता है, वह अधिकारियों की मर्ज़ी से मिलने वाली कोई सुविधा नहीं है; ये हर व्यक्ति के जन्मसिद्ध अधिकार हैं, चाहे उसका ओहदा, हालात या साधन कुछ भी हों।"
कोर्ट ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि राज्य की संवैधानिक ज़िम्मेदारी है कि वह आरोपी लोगों को सार्वजनिक हिंसा और अपमान से बचाए।
आगे कहा गया,
"राज्य की ज़िम्मेदारी है कि वह आरोपी लोगों को अमानवीयता और बर्बरता से बचाए। आम जनता कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकती। आरोपी लोगों पर अंडे फेंकने और उन्हें बुरा-भला कहने या धोखेबाज़ समझने जैसी घटनाओं को रोकना ज़रूरी है और आरोपी लोगों को उचित सुरक्षा देना राज्य की ज़िम्मेदारी है।"
इसके अनुसार, बेंच ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया कि वह राज्य भर के सभी पुलिस स्टेशनों को तुरंत उचित गाइडलाइंस जारी करें ताकि आरोपी लोगों के ख़िलाफ़ अंडे फेंकने, सार्वजनिक हिंसा, मॉब लिंचिंग और अन्य उपद्रव को रोका जा सके। कोर्ट ने आदेश दिया कि ये गाइडलाइंस सभी अधिकारियों को सख़्त पालन के निर्देशों के साथ भेजी जाएँ और पुलिस को सतर्क निगरानी रखने का निर्देश दिया ताकि ऐसी घटनाओं की सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
DGP को निर्देश दिया गया कि वे अगली तारीख पर कोर्ट के निर्देशों के पालन में उठाए गए कदमों का पूरा ब्यौरा देते हुए विस्तृत हलफ़नामा (affidavit) दाखिल करें। राज्य को यह भी निर्देश दिया गया कि वह दो हफ़्ते के भीतर एक जवाबी हलफ़नामा दाखिल करे, जिसमें PIL में लगाए गए विशिष्ट आरोपों का जवाब दिया जाए और याचिका में बताई गई शिकायतों से संबंधित दर्ज सभी मामलों की सूची दी जाए।
इस मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई, 2026 को होगी।
Case: Md. Danish Farooqui v. State of West Bengal & Ors.,


