DNA रिपोर्ट से असली माता-पिता की पुष्टि हुई, फिर भी CWC ने बच्चे को 'लावारिस' घोषित किया: कलकत्ता हाईकोर्ट ने गोद लेने की प्रक्रिया रद्द की
Shahadat
12 Aug 2026 7:54 PM IST

कलकत्ता हाईकोर्ट ने चाइल्ड वेलफेयर कमिटी (CWC) का वह आदेश रद्द किया, जिसमें बच्चे के असली माता-पिता को कस्टडी लेने में "असमर्थ" बताया गया और बच्चे को गोद लेने के लिए कानूनी रूप से मुक्त घोषित करने का निर्देश दिया गया। कोर्ट ने कहा कि कमिटी 'जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल और सुरक्षा) एक्ट, 2015' के तहत ज़रूरी जांच करने में नाकाम रही।
जस्टिस कृष्णा राव ने गोद लेने वाले माता-पिता को निर्देश दिया कि वह बच्चे को CWC, कोलकाता को सौंप दें और कमिटी को आदेश दिया कि वह असली माता-पिता को अपनी बात रखने का मौका देने के बाद नए सिरे से जांच करे।
कोर्ट ने CWC को यह भी निर्देश दिया कि वह जांच एजेंसी से रिपोर्ट ले और चार हफ़्ते के भीतर नई जांच पूरी करे।
यह मामला तब सामने आया, जब 23 मार्च, 2024 को एक नवजात बच्चा नाले के पास एक तंग गली में कई चोटों के साथ पड़ा मिला। स्थानीय लोगों ने बच्चे को बचाया और पुलिस स्टेशन ले गए, जहां से उसे आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भेजा गया।
रितम दास नाम के एक व्यक्ति ने बच्चे का असली पिता होने का दावा किया और बच्चे को पुलिस स्टेशन और अस्पताल ले जाने में स्थानीय लोगों का साथ दिया। इसके बाद याचिकाकर्ता अस्मिता पोद्दार अस्पताल पहुँचीं और बच्चे की असली माँ होने का दावा किया।
इसके बाद मामला CWC के सामने रखा गया, जिसने बच्चे की कस्टडी ले ली और उसे एक स्पेशलाइज़्ड एडॉप्शन एजेंसी (गोद लेने वाली विशेष एजेंसी) के पास भेज दिया।
पोद्दार ने बच्चे की वापसी के लिए हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। कार्यवाही के दौरान, CWC ने DNA टेस्ट कराने का निर्देश दिया। टेस्ट से यह साबित हो गया कि पोद्दार और रितम दास ही बच्चे के असली माता-पिता हैं।
कोर्ट ने गौर किया कि पुलिस जांच में आखिरकार यह पाया गया कि पोद्दार ने खुद कोई अपराध नहीं किया। जांच रिपोर्ट के अनुसार, बच्चे की नानी लक्ष्मी पोद्दार ने पोद्दार की गैर-मौजूदगी में नवजात को तंग गली में छोड़ दिया था; आरोप है कि उन्होंने ऐसा पोद्दार के रितम दास के साथ रिश्ते और शादी पर आपत्ति के कारण किया।
जांच के दौरान लक्ष्मी पोद्दार की मौत हो गई, जिसके बाद पुलिस ने उनके खिलाफ़ मामला बंद करने और अस्मिता पोद्दार को आरोप मुक्त करने की मांग करते हुए अंतिम रिपोर्ट सौंपी। DNA रिपोर्ट से माता-पिता की पहचान साबित होने के बावजूद, CWC ने 18 नवंबर, 2024 को एक आदेश जारी किया। इसमें बच्चे को 'लावारिस' घोषित किया गया और उसके बायोलॉजिकल माता-पिता को उसे वापस लेने के लिए 'असमर्थ' माना गया।
कमेटी ने 'स्पेशलाइज़्ड एडॉप्शन एजेंसी' को बच्चे को गोद देने की कानूनी प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया।
हाईकोर्ट ने CWC द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया में खामियां पाईं और उसे रद्द कर दिया।
इसके बाद रिट याचिका को मंज़ूरी दी गई।
CWC द्वारा रोक (स्टे) की मांग किए जाने के बावजूद, कोर्ट ने अपने फ़ैसले पर रोक लगाने से इनकार किया।
Case: Asmita Poddar @ Payel Poddar Vs. The State of West Bengal & Ors.


