'ट्रबलमेकर' की सूची बनाकर गिरफ्तारी क्यों? कलकत्ता हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा सवाल

Praveen Mishra

22 April 2026 4:02 PM IST

  • ट्रबलमेकर की सूची बनाकर गिरफ्तारी क्यों? कलकत्ता हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा सवाल

    कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले कथित “ट्रबलमेकर” सूची के आधार पर गिरफ्तारी के निर्देशों को लेकर भारत निर्वाचन आयोग से सवाल किया है कि जब कानून और वैधानिक प्राधिकरण पहले से मौजूद हैं, तो ऐसे आदेश की जरूरत क्या है।

    चीफ जस्टिस सुजय पॉल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ यह सुनवाई एक जनहित याचिका पर कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग ने “गुप्त रूप से” एक सूची तैयार की है, जिसके आधार पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जा सकता है।

    सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।

    याचिका में क्या आरोप?

    याचिका अधिवक्ता मोहम्मद दानिश फारूकी द्वारा दायर की गई है। इसमें कहा गया है कि कथित सूची में मुख्य रूप से टीएमसी से जुड़े कार्यकर्ता, पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल हैं।

    याचिका में कहा गया है कि बिना किसी ठोस आपराधिक मामले या कानूनी आधार के गिरफ्तारी करना व्यक्तिगत स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सीधा हमला होगा।

    कोर्ट की टिप्पणी

    सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा—

    यदि कोई अपराध है, तो उसके लिए पहले से कानून और पुलिस मौजूद है

    ऐसे में अलग से “ट्रबलमेकर” सूची बनाकर गिरफ्तारी का निर्देश क्यों?

    चुनाव आयोग का पक्ष

    चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दामा शेषाद्रि नायडू ने कहा कि—

    “आपात परिस्थितियों” में ऐसे कदम उठाना जरूरी था

    यह संविधान के अनुच्छेद 162 के तहत संभव है

    जानकारी संवेदनशील है, इसलिए सार्वजनिक नहीं की जा सकती

    उन्होंने कहा कि ऐसे निर्देश प्रशासन को सतर्क करने और चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप रोकने के लिए दिए जाते हैं।

    याचिकाकर्ता का तर्क

    याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने कहा—

    चुनाव आयोग के पास गिरफ्तारी का अधिकार नहीं है

    यह अधिकार केवल पुलिस और मजिस्ट्रेट के पास है

    “ट्रबलमेकर” जैसा कोई शब्द कानून में नहीं है

    उन्होंने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला और “शक्ति का दुरुपयोग” बताया।

    राज्य सरकार का रुख

    पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता ने भी याचिकाकर्ता का समर्थन किया।

    उन्होंने कहा कि “ट्रबलमेकर” शब्द किसी भी कानून में नहीं है

    कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है

    बिना किसी वैधानिक आधार के किसी को हिरासत में नहीं लिया जा सकता

    अन्य महत्वपूर्ण बिंदु

    चुनाव 23 और 29 अप्रैल को निर्धारित हैं

    अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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