Worli Hit-n-Run Case: बॉम्बे हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी को अवैध घोषित करने की मांग वाली याचिका खारिज की

  • Worli Hit-n-Run Case: बॉम्बे हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी को अवैध घोषित करने की मांग वाली याचिका खारिज की

    वर्ली हिट एन रन मामले के आरोपियों को आज उस समय झटका लगा जब बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी मिहिर शाह और उसके ड्राइवर राजर्षि बिंदावत की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज की।

    जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की खंडपीठ ने याचिकाओं को खारिज कर दिया।

    आदेश की विस्तृत प्रति अभी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

    शाह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के करीबी सहयोगी राजेश शाह के बेटे हैं। मुंबई के वर्ली इलाके में सात जुलाई की तड़के नशे की हालत में अपनी बीएमडब्ल्यू कार चलाते समय एक महिला को अपनी कार से घसीटने के दो दिन बाद नौ जुलाई को उन्हें गिरफ्तार किया गया था।

    इससे पहले, खंडपीठ दलीलें सुन रही थी लेकिन उसने कहा कि कई मामलों में आरोपियों को केवल तकनीकी आधार पर राहत मिलती है और उन्हें पुलिस की हिरासत से रिहा कर दिया जाता है, जिससे किसी न किसी तरह जांच प्रभावित होती है, न्यायाधीशों ने इस मुद्दे को संतुलित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया क्योंकि हर मामले में, विशेष रूप से गंभीर अपराध में, एक आरोपी को सिर्फ इसलिए रिहा नहीं किया जा सकता क्योंकि उसे गिरफ्तारी के आधार के बारे में नहीं बताया गया था।

    उन्होंने कहा, 'हमें संतुलन बनाने की जरूरत है. कभी-कभी अपराध बहुत गंभीर होता है जैसे कि इस मामले में, महिला को घसीटा गया और फिर आपने (आरोपी) दायर किया ... आप किस तरह के नागरिक हैं? आप कहते हैं कि आपके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया गया है, उनके (पीड़ितों के) मौलिक अधिकारों का क्या? एक स्पष्ट रूप से क्रोधित न्यायमूर्ति डांगरे ने देखा था।

    सुनवाई के दौरान, जस्टिस डांगरे ने इस तरह के तकनीकी आधार पर आरोपियों की रिहाई पर भी चिंता व्यक्त की थी और इस तरह संकेत दिया था कि इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के लिए एक "परीक्षण मामले" के रूप में लिया जा सकता है ताकि यह तय किया जा सके कि क्या अभियुक्तों को, भले ही गंभीर अपराधों में, ऐसे तकनीकी आधार पर रिहा किया जा सकता है।

    जस्टिस डांगरे ने कहा "इसे एक परीक्षण का मामला होने दें ,हम जांच करेंगे कि क्या ऐसे मामलों में अपराध की गंभीरता पर भी विचार करने की जरूरत है या नहीं। पीड़ितों के मौलिक अधिकारों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए”

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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