सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने 22 पुलिसकर्मियों की बरी बरकरार रखी, कहा- साजिश साबित नहीं

  • सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने 22 पुलिसकर्मियों की बरी बरकरार रखी, कहा- साजिश साबित नहीं

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति के कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में 22 पुलिसकर्मियों को बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष कथित साजिश और अपहरण की कहानी साबित करने में विफल रहा तथा पूरा मामला केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था, जिसकी कड़ियां पूरी तरह साबित नहीं हो सकीं।

    चीफ़ जस्टिस शील नागू चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखाड की खंडपीठ ने कहा कि 90 से अधिक गवाह hostile हो गए, जिससे अभियोजन के मामले की विश्वसनीयता प्रभावित हुई। अदालत ने कहा कि कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह यह साबित नहीं कर सका कि पुलिसकर्मियों ने तीनों का अपहरण किया था।

    खंडपीठ ने यह भी कहा कि अभियोजन फर्जी मुठभेड़ का मकसद साबित नहीं कर पाया। जांच अधिकारी ने भी स्वीकार किया कि पुलिस अधिकारियों को किसी राजनीतिक या आर्थिक लाभ का कोई सबूत नहीं मिला।

    अदालत ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि सोहराबुद्दीन के शरीर पर नजदीक से गोली चलने के सामान्य संकेत नहीं मिले, जिससे फर्जी मुठभेड़ की थ्योरी कमजोर पड़ती है। कौसर बी की कथित हत्या के संबंध में भी कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया गया।

    हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी के बरी होने के फैसले में केवल इस आधार पर हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता कि दूसरा दृष्टिकोण भी संभव है। इन टिप्पणियों के साथ अदालत ने 22 पुलिसकर्मियों की बरी को बरकरार रखा।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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