शादी को कानूनी मान्यता मिले बिना सेम-सेक्स कपल 'जीवनसाथी' के तौर पर मिलने वाले टैक्स फ़ायदों का दावा नहीं कर सकते: IT डिपार्टमेंट ने बॉम्बे हाईकोर्ट से कहा
Shahadat
9 July 2026 10:20 AM IST

Same Sex Marriage
इनकम टैक्स एक्ट (IT Act) की धारा 56(2)(x) के तहत 'छूट' का फ़ायदा पाने के लिए—जो विपरीत लिंग वाले जोड़ों (Heterosexual Couples) के बीच उपहारों पर टैक्स से छूट देती है—एक सेम-सेक्स कपल को पहले अपने रिश्ते को कानूनी रूप से 'शादी' या 'जीवनसाथी' (Spouse) आदि के तौर पर मान्यता दिलानी होगी। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट को यह बात बताई।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने एक सेम-सेक्स कपल की याचिका का विरोध किया। इस याचिका में IT Act की धारा 56(2)(x) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई, जो विपरीत लिंग वाले जोड़ों के बीच उपहारों पर टैक्स से छूट देती है।
जस्टिस बर्गेस कोलाबावाला और जस्टिस फिरदोष पूनीवाला की डिवीज़न बेंच के सामने 14 अक्टूबर, 2025 को दायर एक हलफ़नामे में IT डिपार्टमेंट ने बेंच से याचिका को खारिज करने का आग्रह किया है क्योंकि यह 'गलत धारणा पर आधारित' (misconceived) याचिका है।
इनकम टैक्स (जुडिशियल) के प्रिंसिपल कमिश्नर संदीप दहिया द्वारा दायर हलफ़नामे में कहा गया कि यह रिट याचिका कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है, क्योंकि याचिका में की गई मांग का इनकम टैक्स एक्ट से कोई लेना-देना नहीं है।
IT डिपार्टमेंट ने कहा,
"याचिकाकर्ता इनकम टैक्स एक्ट का इस्तेमाल करके 'शादी/पत्नी-पति/जीवनसाथी' (Spouse) के उस अर्थ को चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे अलग-अलग शादी कानूनों के तहत कानूनी रूप से समझा जाता है और उसी तरह इनकम टैक्स एक्ट के तहत लागू किया जाता है। मेरी विनम्र राय में, ऐसा करना जायज़ नहीं है। याचिकाकर्ता अपने रिश्ते को कानूनी रूप से 'शादी/जीवनसाथी/पत्नी-पति' के तौर पर मान्यता दिलाए बिना ही इनकम टैक्स के तहत 'जीवनसाथी' का फ़ायदा पाना चाहते हैं। मेरा कहना है कि इनकम टैक्स एक्ट के तहत किसी भी रिश्ते को शादी, पत्नी-पति या जीवनसाथी के तौर पर तब तक मान्यता नहीं दी जाएगी, जब तक कि उसे भारत के किसी शादी कानून के तहत मान्यता न मिली हो। याचिकाकर्ताओं ने ऐसा कोई कानून पेश नहीं किया है जो उनके रिश्ते को शादी या जीवनसाथी के तौर पर मान्यता देता हो। बल्कि, याचिकाकर्ता यह तर्क देने की कोशिश कर रहे हैं कि इनकम टैक्स एक्ट को शादी/जीवनसाथी/पत्नी-पति की परिभाषा अलग-अलग शादी कानूनों में दी गई परिभाषा या अर्थ के विपरीत देनी चाहिए।"
हलफनामे में आगे कहा गया कि याचिकाकर्ताओं ने इनकम टैक्स अथॉरिटी की किसी भी कार्रवाई या आदेश को इस रिट याचिका में चुनौती नहीं दी है।
हलफनामे में लिखा,
"यह याचिका गलतफहमी पर आधारित है। जब किसी आदेश को चुनौती नहीं दी गई तो यह याचिका रिट याचिका के तौर पर स्वीकार्य नहीं है। सिर्फ़ इसी आधार पर याचिका खारिज कर दी जानी चाहिए।"
गौरतलब है कि पायियो आशीहो और उनके पार्टनर विवेक दीवान ने अपनी याचिका में तर्क दिया कि धारा 56(2)(x), जो विपरीत-लिंगी जोड़ों (Heterosexual Couples) को सुरक्षा देती है, समलैंगिक जोड़ों के प्रति "अप्रत्यक्ष रूप से भेदभावपूर्ण" है। इस जोड़े ने अपने वकील ध्रुव जानसेन-संघवी के ज़रिए यह याचिका दायर की।
दिलचस्प बात यह है कि जोड़े ने बेंच से आग्रह किया कि धारा 56(2)(x) के प्रावधान में 'समलैंगिक जोड़ों' को भी शामिल किया जाए, क्योंकि यह प्रावधान केवल विपरीत-लिंगी जोड़ों को ही छूट देता है।
संदर्भ के लिए, IT Act की धारा 56(2)(x) के तहत मिलने वाले किसी भी पैसे, संपत्ति या अन्य एसेट पर टैक्स लगता है, अगर उनकी कीमत 50,000 रुपये से ज़्यादा हो। कानून के तहत ऐसी 'प्राप्तियों' या 'गिफ्ट' को 'अन्य स्रोतों से आय' (income from other sources) के तौर पर वर्गीकृत किया जाता है। लेकिन इस प्रावधान का पांचवां हिस्सा (proviso) ऐसे गिफ्ट को टैक्स से छूट देता है जो 'रिश्तेदारों' से मिलते हैं, जिसमें 'जीवनसाथी' (spouses) भी शामिल हैं।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि प्रावधान का यही हिस्सा समलैंगिक जोड़ों के प्रति 'भेदभावपूर्ण' है, क्योंकि इसमें यह नहीं बताया गया कि क्या यह ऐसे जोड़ों पर भी लागू होगा, क्योंकि कानून समलैंगिक पार्टनर्स को 'जीवनसाथी' के तौर पर मान्यता नहीं देता है।
पिछले साल नवंबर में जस्टिस कोलाबावाला की अगुवाई वाली बेंच ने इस मामले में कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार किया था। पिछले महीने, जज 9 जुलाई को अंतिम दलीलें सुनने के लिए सहमत हुए। हालांकि, सोमवार (6 जुलाई) को एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने मामले में और समय (स्थगन) की मांग की और कहा कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता इस मामले में IT विभाग की ओर से दलीलें पेश करेंगे। इसलिए ASG ने कुल तीन हफ़्ते का समय मांगा।
जजों ने 6 जुलाई के आदेश में कहा,
"हमने देखा है कि रेवेन्यू (सरकारी पक्ष) के कहने पर इस मामले को कई बार टाला गया। आखिरी मौके के तौर पर, और यह ध्यान में रखते हुए कि सॉलिसिटर जनरल इस मामले में पेश होंगे, हम इस रिट याचिका को 30 जुलाई, 2026 को दोपहर 3:00 बजे सुनवाई के लिए लिस्ट कर रहे हैं। यह देखते हुए कि याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश होने वाले वकील इस कोर्ट में बहस करने के लिए विदेश से आते हैं, हमने रेवेन्यू को साफ कर दिया है कि अब और समय नहीं दिया जाएगा।"
इसके अनुसार, अब इस मामले की सुनवाई 30 जुलाई को होगी।
Case Title: Payio Ashihio vs Union of India (Writ Petition 3784 of 2025)


