राधे मां के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा करेगा कानून, आपत्तिजनक ऑनलाइन कंटेंट हटाने का बॉम्बे हाईकोर्ट का निर्देश
Praveen Mishra
3 Nov 2026 7:33 PM IST

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार (3 नवंबर) को स्वयंभू धर्मगुरु और लोकप्रिय आध्यात्मिक प्रवचनकर्ता राधे मां (सुखविंदर कौर) के व्यक्तित्व और प्रचार संबंधी अधिकारों (Personality and Publicity Rights) की रक्षा करते हुए इंटरनेट पर मौजूद आपत्तिजनक सामग्री हटाने का निर्देश दिया।
जस्टिस माधव जामदार की एकल पीठ ने Google और अन्य संबंधित संस्थाओं को राधे मां द्वारा चिह्नित सभी आपत्तिजनक ऑनलाइन कंटेंट हटाने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि इस सामग्री से उनके व्यक्तित्व संबंधी अधिकारों और नैतिक अधिकारों (Moral Rights) को नुकसान पहुंचा है।
अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि राधे मां पिछले तीन दशकों से अधिक समय से श्री महंत रामदीन दास 1008 की अनुयायी हैं और देश-विदेश में उनके बड़ी संख्या में भक्त हैं।
अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर याचिका
राधे मां की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट वेंकटेश धोंड ने कोर्ट के समक्ष कई ऐसे URL की सूची पेश की, जिन पर कथित तौर पर अश्लील और यौन रूप से स्पष्ट सामग्री उपलब्ध थी।
उन्होंने दलील दी कि ये सामग्री न केवल अश्लील, मानहानिकारक और अपमानजनक है, बल्कि इसमें राधे मां को गलत तरीके से भी दर्शाया गया है। इससे उनकी निजता, गरिमा और एक लोकप्रिय आध्यात्मिक व्यक्तित्व के रूप में प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।
वकील ने बताया कि राधे मां की एक विशिष्ट पहचान है। वह आमतौर पर लाल वस्त्र धारण करती हैं, माथे पर लाल तिलक लगाती हैं और हाथ में त्रिशूल रखती हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ कंटेंट में राधे मां के चेहरे और आवाज का इस्तेमाल किसी दूसरी महिला के शरीर पर सुपरइम्पोज करके किया गया है।
'व्यक्तित्व, निजता और गरिमा के अधिकारों का उल्लंघन'
मामले में उपलब्ध सामग्री का अवलोकन करने के बाद जस्टिस माधव जामदार ने कहा कि प्रथम दृष्टया राधे मां के व्यक्तित्व, नैतिक और प्रचार संबंधी अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा:
"रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री के अवलोकन से स्पष्ट है कि संबंधित कंटेंट के माध्यम से वादी के व्यक्तित्व अधिकारों, नैतिक अधिकारों और प्रचार संबंधी अधिकारों का उल्लंघन किया गया है। इसमें ऐसी सामग्री भी शामिल है, जिसमें उनके चेहरे को किसी अन्य महिला के शरीर पर सुपरइम्पोज किया गया है और उनकी आवाज का इस्तेमाल किया गया है।"
कोर्ट ने आगे कहा कि उनके व्यक्तित्व और प्रचार संबंधी अधिकार, निजता का अधिकार और जीवन का अधिकार संरक्षित हैं। उनके गरिमा के साथ जीने के अधिकार का भी उल्लंघन हुआ है।
इन परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने माना कि अंतरिम राहत देने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं।
Google और सरकारी विभागों को आपत्तिजनक सामग्री हटाने का निर्देश
हाईकोर्ट ने Google, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) को निर्देश दिया कि राधे मां द्वारा चिह्नित सभी आपत्तिजनक सामग्री को इंटरनेट से हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
कोर्ट ने यह आदेश उनके व्यक्तित्व, निजता, गरिमा और नैतिक अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से पारित किया।

