दूसरी शादी करने पर नौकरी से निकाला तो बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- यह 'चौंकाने वाला'
Shahadat
24 April 2026 10:47 AM IST

एक अहम फैसले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार (23 अप्रैल) को कहा कि हालांकि हिंदू धर्म में पहली शादी के रहते दूसरी शादी करना जायज़ नहीं है। फिर भी ऐसा 'गलती' करने वाले किसी सरकारी कर्मचारी को नौकरी से निकालने जैसी 'चौंकाने वाली' सज़ा नहीं दी जा सकती।
जस्टिस रविंद्र घुगे और जस्टिस हितेन वेनेगांवकर की डिवीज़न बेंच ने संतोष चव्हाण को नौकरी पर वापस लेने का आदेश दिया। संतोष चव्हाण ने शुरू में बिलासपुर में रेलवे पुलिस फोर्स (RPF) में पुलिस कांस्टेबल के तौर पर जॉइन किया था और बाद में उनका ट्रांसफर ठाणे ज़िले के कल्याण में जूनियर क्लर्क के तौर पर हो गया। उन्हें इस आधार पर नौकरी से निकाल दिया गया था कि उन्होंने अपनी पहली शादी के रहते हुए भी दूसरी शादी की थी।
चव्हाण के वकील अभिनव चंद्रचूड़ के मुताबिक, चव्हाण ने 21 अप्रैल, 2008 को शादी की थी। हालांकि, कुछ अनबन की वजह से दोनों अलग हो गए और अब उनके बीच कानूनी लड़ाई चल रही है। साल 2016 में चव्हाण ने दूसरी शादी की, जबकि उनकी पहली शादी अभी कानूनी तौर पर खत्म भी नहीं हुई। इसलिए उनके एम्प्लॉयर ने रेलवे सर्विस (कंडक्ट) रूल्स, 1968 का उल्लंघन करने के आरोप में चव्हाण के खिलाफ एक 'शुरुआती जांच' शुरू की।
जांच करने के लिए अधिकारी को नियुक्त किया गया, जिसने गवाहों और खुद चव्हाण के बयान दर्ज किए। फिर 1968 के नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में उनके खिलाफ चार्जशीट दायर की। इसके बाद फरवरी, 2021 में RPF, कल्याण के असिस्टेंट सिक्योरिटी कमिश्नर ने यह देखते हुए कि चव्हाण की नौकरी के अभी कम से कम 19 साल बाकी हैं, उन्हें एक इंक्रीमेंट रोकने की सज़ा दी।
हालांकि, RPF की रिविजनल अथॉरिटी ने इस मामले का 'खुद से' (suo motu) संज्ञान लिया। साथ ही चव्हाण के खिलाफ एक नई जांच का आदेश दिया। साथ ही एक नया जांच अधिकारी भी नियुक्त किया।
अथॉरिटी ने नए अधिकारी से चव्हाण के लिए एक 'बड़ी' सज़ा की सिफारिश करने को कहा, क्योंकि पिछले अधिकारी ने एक 'छोटी' सज़ा की सिफारिश की थी। इसके बाद, चव्हाण को एक नई चार्जशीट जारी की गई और मार्च 2025 से उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का आदेश पारित किया गया।
अपनी बर्खास्तगी को चुनौती देते हुए चव्हाण ने पहले केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, लेकिन वहां से कोई राहत न मिलने पर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
Case Title: Santosh Motiram Chavan vs Union of India (Writ Petition 540 of 2025)

