मराठी भाषा विवाद: महाराष्ट्र सरकार ने हाईकोर्ट में कहा- सभी रिक्शा और कैब ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए एक साल का समय दिया जाएगा

Shahadat

29 Aug 2026 8:25 PM IST

  • मराठी भाषा विवाद: महाराष्ट्र सरकार ने हाईकोर्ट में कहा- सभी रिक्शा और कैब ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए एक साल का समय दिया जाएगा

    महाराष्ट्र सरकार ने शनिवार को बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि राज्य भर के ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और कैब ड्राइवरों को मराठी सीखने और उसमें महारत हासिल करने के लिए एक साल का समय दिया जाएगा। सरकार ने पहले नियम बनाया था कि ऐसे ड्राइवरों को भाषा का "काम-चलाऊ ज्ञान" होना चाहिए, जिसे चुनौती दी गई।

    यह जानकारी एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखाड की बेंच के सामने दी गई। यह बेंच चार उबर ड्राइवरों द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें टैक्सी परमिट पाने के लिए अनिवार्य मराठी भाषा की शर्त को चुनौती दी गई।

    सुनवाई के दौरान, बेंच ने मीडिया रिपोर्टों का संज्ञान लिया कि राज्य सरकार ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए एक साल का समय देने पर सहमत हो गई।

    एक्टिंग चीफ जस्टिस घुगे ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने मुख्यमंत्री से भी मुलाकात की थी और रिपोर्टों से पता चलता है कि ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों से जुड़ा मुद्दा सुलझा लिया गया।

    बेंच ने शुरू में संकेत दिया कि इस रिपोर्ट किए गए फैसले को देखते हुए PIL का निपटारा किया जा सकता है। हालांकि, एडिशनल गवर्नमेंट प्लीडर ज्योति चव्हाण ने कोर्ट को बताया कि उन्हें यह वेरिफाई करना होगा कि क्या राज्य ने वास्तव में कोई औपचारिक नीतिगत फैसला लिया है।

    इसके बाद बेंच ने सरकारी वकील को ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट से बात करके स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया।

    जब मामले पर दोबारा सुनवाई हुई तो एडिशनल गवर्नमेंट प्लीडर ने कोर्ट को बताया कि ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर ने पुष्टि की कि ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और कैब ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए एक साल का समय दिया जा रहा है।

    इसके बाद कोर्ट ने राज्य की ओर से दिए गए बयान को रिकॉर्ड पर लिया।

    आदेश में दर्ज किया गया कि ट्रांसपोर्ट कमिश्नर ने एडिशनल गवर्नमेंट प्लीडर को कोर्ट को यह बताने का निर्देश दिया कि सभी ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और कैब ड्राइवरों को मराठी भाषा सीखने और उसमें महारत हासिल करने के लिए एक साल का समय दिया जा रहा है।

    सरकार के बयान को स्वीकार करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने PIL का निपटारा किया।

    Case Title: Mohd Kasim Ahmad vs State of Maharashtra

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