नितिन गडकरी E20 डीपफेक: बॉम्बे हाईकोर्ट ने X से कंटेंट हटाने के आदेश का पालन करने को कहा
Shahadat
2 Sept 2026 8:38 PM IST

बुधवार (2 सितंबर) को बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को उन डीपफेक और AI वीडियो को हटाने का अपना आदेश दोहराया, जिनमें वरिष्ठ BJP नेता और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को इथेनॉल-मिश्रित ईंधन की विवादास्पद नीति से जोड़ा गया।
हाईकोर्ट ने प्लेटफॉर्म्स को और भी आपत्तिजनक कंटेंट हटाने का आदेश दिया, जिसे हाल ही में गडकरी ने उजागर किया।
सिंगल-जज जस्टिस आरिफ डॉक्टर ने कहा कि 5 अगस्त को स्पष्ट आदेश जारी होने के बावजूद, कुछ आपत्तिजनक कंटेंट, खासकर X (पहले ट्विटर) पर, अभी तक नहीं हटाया गया। इसलिए उन्होंने प्लेटफॉर्म को अपना जवाब (हलफनामा) और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया।
गौरतलब है कि 5 अगस्त को जज ने गडकरी के मुकदमे में बताए गए सभी कंटेंट को हटाने का आदेश दिया, क्योंकि उस सामग्री को "अपने आप में मानहानिकारक" पाया गया।
हालांकि, बुधवार शाम को गडकरी की ओर से पेश वकील संदीप लड्डा ने बेंच को बताया कि X ने अभी तक उस आदेश का पालन नहीं किया, जबकि इंस्टाग्राम जैसे अन्य प्लेटफॉर्म्स ने आपत्तिजनक कंटेंट हटा दिया।
इस बात पर ध्यान देते हुए जज ने X को गडकरी के खिलाफ सभी आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के अपने पिछले आदेश का पालन करने का निर्देश दिया। जज ने संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को उस आपत्तिजनक सामग्री को हटाने का भी निर्देश दिया, जिसे गडकरी ने अपने वकील के माध्यम से हाल ही में कोर्ट के संज्ञान में लाया था।
इसके बाद मामले की सुनवाई 16 सितंबर तक के लिए टाल दी गई।
यह बताना उचित होगा कि 27 जुलाई को सिंगल-जज जस्टिस अभय आहूजा ने गडकरी को मानहानिकारक, डीपफेक और AI-जनरेटेड कंटेंट पोस्ट करने के लिए X, मेटा प्लेटफॉर्म्स, गूगल और अज्ञात अन्य लोगों पर मुकदमा करने की अनुमति दी थी।
अपने मुकदमे में सड़क और परिवहन मंत्री ने बताया कि 2003 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) शुरू किया। यह एक राष्ट्रीय नीतिगत पहल थी जिसका उद्देश्य चरणबद्ध तरीके से पेट्रोल में इथेनॉल मिलाना था। और 2025-26 में मौजूदा सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने (E20) का लक्ष्य हासिल कर लिया। इसे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय देखता है, जिसने EBP के लक्ष्यों, इसे लागू करने और इसकी प्रगति के बारे में आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियां, सार्वजनिक बयान और स्पष्टीकरण भी जारी किए।
उन्होंने बताया कि वे 2014 से अब तक सड़क परिवहन मंत्री रहे हैं और E20 नीति से जुड़े फैसलों में उनकी कोई भूमिका नहीं है। हालांकि, मंत्री का कहना है कि अज्ञात लोगों ने अपमानजनक और डीपफेक कंटेंट बनाया, प्रकाशित किया और फैलाया। इसमें उन्हें गलत तरीके से EBP को लागू करने के लिए जिम्मेदार और व्यक्तिगत रूप से इससे जुड़ा हुआ दिखाया गया और उन पर कई अपमानजनक, शर्मनाक और बदनामी वाले आरोप लगाए गए।
उनकी याचिका में कहा गया,
"अपमानजनक कंटेंट में यह भी गलत, दुर्भावनापूर्ण और बिना किसी आधार के आरोप लगाया गया कि वादी और/या उनके परिवार के सदस्यों ने EBP को लागू करने से अनुचित आर्थिक लाभ उठाया। इस तरह, भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, हितों का टकराव, आधिकारिक पद का दुरुपयोग, सरकारी अधिकार का गलत इस्तेमाल और अन्य अनुचित कार्यों का संकेत दिया गया।"
अपनी याचिका में गडकरी ने E20 विवाद से उन्हें जोड़ने वाली कम से कम 24 ऐसी कथित अपमानजनक पोस्ट का भी जिक्र किया और अदालत से उन्हें हटाने का आदेश देने का आग्रह किया।
गडकरी ने आगे कहा,
"इस मुकदमे को दायर करने का मकसद आम जनता को वादी या उनके कार्यालय द्वारा लिए गए किसी भी फैसले पर चर्चा, बहस, विश्लेषण या निष्पक्ष और सही आलोचना करने से रोकना या प्रतिबंधित करना नहीं है। वादी सम्मानपूर्वक कहते हैं कि वे अपने सार्वजनिक जीवन, सरकारी नीतियों या आधिकारिक कार्यों के बारे में निष्पक्ष आलोचना, असहमति, बहस या सही राय व्यक्त करने को दबाना या रोकना नहीं चाहते हैं। हालांकि, अपमानजनक कंटेंट साफ तौर पर झूठा, मनगढ़ंत, दुर्भावनापूर्ण, अपमानजनक और मानहानि करने वाला है, और कानून की नजर में यह मानहानि है। इसके अलावा, डीपफेक कंटेंट वादी की जानकारी, सहमति या अनुमति के बिना उनके व्यक्तित्व और प्रचार के अधिकारों का गलत इस्तेमाल करता है।"
Case Title: Nitin Jairam Gadkari vs Meta Platforms [IA(L)/25165/2026]


