'पैसे के लालच में आए युवा, न कि पेशेवर हत्यारे': बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपहरण और हत्या के मामले में मौत की सज़ा बदली
Shahadat
9 July 2026 10:30 AM IST

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में एक लड़के के अपहरण और हत्या के मामले में दो लोगों की मौत की सज़ा को 30 साल की जेल में बदल दिया। कोर्ट ने कहा कि ये दोनों दोषी 'आम युवा' थे जो अमीर बनने का प्लान फेल होने पर 'परेशान' हो गए थे और 'तुरंत समाधान' के लिए उन्होंने लड़के की हत्या की थी।
जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की बेंच ने माना कि चेतन पगारे और अमन जाट का परिचित लड़के का अपहरण करना और उसे कई चोटें पहुँचाकर मार डालना 'घिनौना' और 'बेरहम' काम था, लेकिन यह 'दुर्लभतम से दुर्लभ' (rarest of rare) मामला नहीं माना जा सकता।
जजों ने कहा,
"हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि अपराध के समय आरोपी 25 और 22 साल के युवा थे। गलत तरीके से पैसा कमाने की कोशिश में उन्होंने मृतक को अपने साथ आने के लिए कहा और वह उनके जाल में फँस गया, लेकिन फिर उसके पिता से फिरौती वसूलने के लिए उसे बंधक बना लिया गया। दो युवाओं का पैसा कमाने, अमीर बनने और आरामदायक ज़िंदगी जीने का सपना कोई असाधारण इच्छा नहीं कही जा सकती; अपनी उम्र को देखते हुए उन्होंने अपने ही परिचित एक लड़के के अपहरण का आसान तरीका चुना। इसमें कोई शक नहीं कि एक युवा लड़के की कई चोटें पहुँचाकर हत्या कर दी गई और शव को सुनसान जगह पर ले जाकर ठिकाने लगा दिया गया। आरोपियों का यह काम निश्चित रूप से घिनौना है, लेकिन हमारी राय में सिर्फ़ इसी आधार पर इस मामले को मौत की सज़ा के लिए 'दुर्लभतम से दुर्लभ' श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।"
जजों ने बताया कि दोषियों के खिलाफ़ कुछ आपराधिक मामले दर्ज किए गए, लेकिन यह भी नोट किया कि वे उनमें से किसी भी मामले में दोषी नहीं ठहराए गए।
जजों ने कहा,
"वे पेशेवर हत्यारे नहीं थे, लेकिन उन्हें फिरौती की रकम पाने का लालच दिया गया। उन्हें अच्छी तरह पता था कि जिस लड़के का उन्होंने अपहरण किया, वह एक अमीर परिवार से है। आरोपियों ने विपिन के अपहरण और फिरौती की रकम वसूलने की साज़िश रची थी। जब पीड़ित के परिवार को किए गए दो फ़ोन कॉल्स का कोई नतीजा नहीं निकला तो वे उलझन में पड़ गए कि अपनी कैद में रखे पीड़ित का क्या किया जाए। उन्होंने उसे खत्म करना ही सही समझा, क्योंकि अगर उसे छोड़ दिया जाता तो उन पर अपहरण का आरोप लगता। युवा होने के कारण वे जल्दबाज़ी में और बिना सोचे-समझे काम करने वाले थे; उन्होंने लंबे समय के नतीजों की परवाह किए बिना तुरंत समाधान खोजने की कोशिश में उसकी हत्या कर दी। सबूत मिटाने के लिए उन्होंने शव को एक सुनसान जगह पर ठिकाने लगाने की कोशिश की, लेकिन आखिरकार वे पकड़े गए, उन पर जांच हुई और मुकदमा चला।"
25 जून को सुनाए गए और इस हफ़्ते की शुरुआत में उपलब्ध कराए गए 71 पन्नों के फ़ैसले में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि फिरौती के लिए पीड़ित का अपहरण करना, उसे कैद में रखना, फिरौती के लिए कॉल करना और फिरौती की मांग पूरी न होने पर उसकी हत्या कर देना - ये सब दोनों आरोपियों की पहले से सोची-समझी और मिली-जुली कोशिश थी। यह निश्चित रूप से अमानवीय, क्रूर और बेरहम काम है, और दी जाने वाली सज़ा ऐसी होनी चाहिए जो दूसरों के लिए सबक बने।
जजों ने आगे कहा,
"लेकिन जब हम इस सवाल का जवाब देने के लिए आगे बढ़ते हैं कि क्या यह 'सबसे दुर्लभ मामलों' (rarest of rare cases) में से एक है तो हमारा जवाब 'नहीं' में होता है। मौत की सज़ा जैसी कड़ी सज़ा देते समय आनुपातिकता की जांच (proportionality test) करना और मौत की सज़ा और जिस मकसद के लिए यह तय की गई, उनके बीच तार्किक और निष्पक्ष संबंध को ध्यान में रखना ज़रूरी है। हर सज़ा का मकसद एक निवारक प्रभाव (deterrent effect) पैदा करना होता है, लेकिन हर हत्या या कत्ल के मामले में मौत की सज़ा देना सही नहीं है; कोर्ट को मौत की सज़ा तभी देनी चाहिए जब वह उचित हो।"
इन बातों को ध्यान में रखते हुए बेंच ने पगारे और जाट दोनों की मौत की सज़ा को बदलकर 30 साल की कठोर कैद में बदल दिया, जिसमें सज़ा कम करने की कोई सुविधा नहीं होगी।
गौरतलब है कि नासिक की एक स्पेशल कोर्ट ने दिसंबर 2022 में पगारे और जाट को मौत की सज़ा सुनाई। उन्होंने 8 जून 2013 को विपिन बाफ़ना नाम के एक इंजीनियरिंग छात्र का अपहरण किया, जब वह डांस क्लास के लिए बाहर गया था। लेकिन, जब वह वापस नहीं लौटा तो परिवार वाले परेशान हो गए। बाद में रात 11:30 बजे उसने फ़ोन करके बताया कि वह रात भर एक दोस्त के घर रुकेगा और अगली सुबह घर लौटेगा।
जब अगली सुबह भी विपिन घर नहीं लौटा तो परिवार ने डांस क्लास के मालिक से संपर्क किया। उन्होंने बताया कि विपिन पिछली तारीख यानी 8 जून, 2013 को क्लास में नहीं आया था। इसके बाद परिवार ने उसके लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस की विस्तृत जांच में पता चला कि चेतन और अमन ने 1 करोड़ रुपये की फिरौती मांगने के मकसद से विपिन का अपहरण किया था, लेकिन जब उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो उन्होंने उसकी हत्या की।
Case Title: State of Maharashtra vs Chetan Yashwantrao Pagare (Confirmation Case 1 of 2023)


