अगर आप भारत के लिए खेलना चाहते हैं तो भारतीय नागरिकता लें: BCCI के नियम को चुनौती देने वाले OCI कार्ड धारकों से बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा
Shahadat
17 Oct 2026 9:40 AM IST

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के उस फैसले को चुनौती देने वाली 12 युवा क्रिकेटरों (जो OCI कार्ड धारक हैं) की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस हफ्ते की शुरुआत में मौखिक रूप से कहा कि अगर ये युवा खिलाड़ी भारत के लिए खेलने के लिए 'इतने ही बेताब' हैं तो उन्हें भारतीय नागरिकता स्वीकार करके भारत का नागरिक बन जाना चाहिए।
चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की खंडपीठ ने OCI कार्ड धारक केविन कार्तिक की याचिका पर सुनवाई करते हुए गौर किया कि केंद्र सरकार को इस मामले में एक पक्ष बनाया गया, लेकिन उसने अभी तक अपना हलफनामा दाखिल नहीं किया। इस पर खंडपीठ ने मामले को स्थगित करने का संकेत दिया।
हालांकि, वकील कुणाल चीमा (जिनके साथ वकील दत्ता माने भी थे) ने खंडपीठ से आग्रह किया कि मामले की सुनवाई की जाए और उनके मुवक्किलों के पक्ष पर विचार किया जाए। उन्होंने बताया कि वे केवल घरेलू टूर्नामेंटों में खेलने की अनुमति चाहते हैं ताकि वे अपने 'आंकड़े' (Stats) बना सकें, जो इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) जैसे कमर्शियल टूर्नामेंटों में शामिल होने के लिए जरूरी होते हैं।
वकीलों ने बताया कि 2023 तक OCI कार्ड धारकों पर ऐसी कोई पाबंदी नहीं थी। इसके बाद ही BCCI ने यह फैसला लिया, जिसके तहत ऐसे खिलाड़ियों को BCCI के घरेलू टूर्नामेंटों में हिस्सा लेने से रोक दिया गया।
वकीलों ने दलील दी कि याचिकाकर्ता कुछ युवा लड़के हैं, जो भारत में ही रहते हैं, पढ़ाई करते हैं और क्रिकेट खेलते हैं, इसलिए उनके मामले पर विचार किया जाना चाहिए।
हालांकि, खंडपीठ ने कहा कि भारत में पहले से ही युवा प्रतिभाओं की 'भरमार' है, खासकर क्रिकेट में। जजों ने कहा कि हो सकता है कि किसी ने OCI कार्ड धारकों के घरेलू टूर्नामेंटों में खेलने पर आपत्ति जताई हो, जिसके चलते BCCI ने यह नियम लागू किया हो।
चीफ जस्टिस त्रिपाठी ने मौखिक रूप से सवाल किया,
"हमें किसी ऐसे विकसित देश का उदाहरण दें, जहां इस तरह की मांग मान ली जाती हो? क्या UK, US या जर्मनी में ऐसी मांग स्वीकार की जाती है, जहां उनके अपने नागरिकों को मौका न देकर किसी बाहरी व्यक्ति या 'ओवरसीज सिटीजन' (OCI) को मौका दिया जाता हो?"
इस पर चीमा ने बताया कि भारत में OCI कार्ड धारक डॉक्टर या वकील के तौर पर काम कर सकते हैं, तो फिर क्रिकेट क्यों नहीं खेल सकते?
चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की,
"लेकिन क्या उन्हें सरकारी नौकरी मिल सकती है? क्या वे सिविल सेवा परीक्षाओं में हिस्सा ले सकते हैं? जाहिर है, इसका जवाब 'नहीं' है... इसी तरह क्या आप BCCI पर दबाव डाल सकते हैं? हो सकता है कि किसी का ध्यान इस मुद्दे पर न गया हो, लेकिन जाहिर है कि कहीं न कहीं कोई नाराजगी तो रही ही होगी... हो सकता है कि घरेलू खिलाड़ियों ने इस पर आपत्ति जताई हो और इसी वजह से BCCI ने यह फैसला लिया हो... आप IPL के लिए क्यों नहीं खेलते?"
इस पर चीमा ने जवाब दिया कि IPL में खेलने के लिए भी अच्छे आंकड़ों (Stats) की जरूरत होती है, जो केवल घरेलू स्तर पर खेलने से ही मिल सकते हैं। लेकिन पासपोर्ट से जुड़ा यह फैसला OCI कार्ड धारकों को घरेलू स्तर पर खेलने से रोकता है।
इस बिंदु पर चीफ जस्टिस ने BCCI से जानना चाहा कि अगर याचिकाकर्ता यह तर्क दें कि वे यहाँ रहे हैं, यहीं पढ़ाई की और यहीं क्रिकेट खेला है, इस उम्मीद में कि एक दिन उन्हें (भारत के लिए) खेलने का मौका मिलेगा, तो क्या होगा?
इस पर BCCI की ओर से सीनियर एडवोकेट डॉ. बीरेंद्र सराफ ने बताया कि नागरिकता कानून (Citizenship Act) के तहत OCI कार्ड धारकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने की अनुमति नहीं है।
सराफ ने अपनी बात रखी,
"इसलिए वे क्रिकेट खेलकर आजीविका के अधिकार का दावा नहीं कर सकते... केंद्र सरकार ने भी स्पष्ट कहा है कि जब तक आप भारत के नागरिक नहीं हैं, तब तक आप भारत के लिए नहीं खेल सकते... माननीय जज इस तथ्य पर भी विचार कर सकते हैं कि हम (BCCI) खिलाड़ियों पर निवेश करते हैं और उन्हें तैयार करते हैं... ऐसे कई अन्य टूर्नामेंट भी हैं, जो BCCI के अंतर्गत नहीं आते हैं... जैसे रणजी ट्रॉफी BCCI के अंतर्गत आती है, जहां हम खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करते हैं और उन्हें तैयार करते हैं... लेकिन स्कूल/कॉलेज स्तर या निजी अकादमियों जैसे कई अन्य टूर्नामेंट भी होते हैं... वे वहाँ खेल सकते हैं... या फिर वे शौक के तौर पर क्रिकेट खेल सकते हैं, लेकिन इसे आजीविका के साधन के रूप में नहीं अपना सकते।"
चीमा ने इस तर्क का खंडन करते हुए कहा कि जिस तरह OCI कार्ड धारकों के लिए भी शिक्षा एक 'संवैधानिक अधिकार' है, उसी तरह खेल भी शिक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह बच्चे के सर्वांगीण विकास में मदद करता है। इसलिए याचिकाकर्ताओं जैसे बच्चों को इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
चीफ जस्टिस त्रिपाठी ने टिप्पणी की,
"क्या आप इस सिद्धांत के आधार पर सिविल सेवा परीक्षाओं में शामिल हो सकते हैं? नहीं, है ना... आपको शिक्षा पाने और खेलने का पूरा अधिकार है, लेकिन आप BCCI के तहत खेलने की जिद कर रहे हैं... आप भारत की नागरिकता क्यों नहीं ले लेते?... अगर आप भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए इतने ही उत्सुक हैं तो आप भारतीय नागरिक क्यों नहीं बन जाते? अगर आप खेलने के लिए प्रेरित हैं तो आप भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन क्यों नहीं करते... हम एक प्रगतिशील राष्ट्र हैं और हमें एक मानक स्थापित करना चाहिए... न्यूजीलैंड और डेनमार्क जैसे कुछ देशों में हमारे जितने खिलाड़ी नहीं हैं, जबकि हमारे पास बहुत प्रतिभा है... आपको एक विकल्प चुनना होगा, आप दोनों चीजें (खेलने का अधिकार और OCI कार्ड) एक साथ नहीं रख सकते... हमारे यहाँ प्रतिभा की कोई कमी नहीं है।"
इस पर अपनी बात रखते हुए सराफ ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता जैसे खिलाड़ी भारतीय नागरिक बन जाते हैं तो BCCI उनका खुले दिल से स्वागत करेगा। उन्होंने कहा कि यह संस्था हमेशा नई प्रतिभाओं का स्वागत करने के लिए तैयार रहती है, बशर्ते खिलाड़ी भारतीय हो।
हालांकि, चीमा ने कहा कि सुनवाई की अगली तारीख पर वह कुछ ऐसे अंतरराष्ट्रीय समझौतों (कन्वेंशन) को रिकॉर्ड पर रखेंगे, जिनके अनुसार हर बच्चे को अपनी नागरिकता चुनने का अधिकार है और उसे इसे बदलने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
बेंच ने स्पष्ट किया,
"लेकिन, वकील साहब, आपको अपनी नागरिकता बदलने के लिए कोई मजबूर नहीं कर रहा है... बात बस इतनी है कि आप खेलने की अनुमति पाने की जिद कर रहे हैं, इसलिए एक सुझाव दिया गया।"
इस बीच सराफ ने बताया कि कुछ खिलाड़ियों ने पहले ही भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया और उनके आवेदन प्रक्रिया में हैं। इसलिए जजों ने BCCI, केंद्र सरकार और याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई पर उन OCI कार्ड धारकों के आवेदनों की स्थिति के बारे में बताएं, जो भारत के लिए खेलने के लिए अपनी नागरिकता बदल रहे हैं।
इस मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर को होगी।
Case Title : Kavin Kartik vs BCCI

