टैक्स मामले में 'तत्काल सुनवाई' की मांग पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने उद्योगपति अनिल अंबानी पर ₹25,000 का जुर्माना लगाया

Praveen Mishra

3 April 2025 4:13 PM IST

  • टैक्स मामले में तत्काल सुनवाई की मांग पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने उद्योगपति अनिल अंबानी पर ₹25,000 का जुर्माना लगाया

    उद्योगपति अनिल अंबानी को झटका देते हुए, बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में उनकी याचिका की तत्काल सुनवाई की मांग पर ₹25,000 का जुर्माना लगाया है। याचिका आयकर विभाग द्वारा अप्रैल 2022 में जारी किए गए नोटिस को चुनौती देने के लिए दायर की गई थी।

    जस्टिस महेश सोनक और जस्टिस जितेंद्र जैन की खंडपीठ ने कहा कि अंबानी द्वारा बनाई गई 'कृत्रिम तात्कालिकता' को वह स्वीकार नहीं कर सकती। अंबानी ने अदालत से आग्रह किया था कि आयकर विभाग द्वारा अप्रैल 2022 में जारी किए गए शो-कॉज नोटिस को चुनौती देने वाली उनकी याचिका की तुरंत सुनवाई की जाए।

    अदालत ने अपने 27 मार्च के आदेश में कहा, "इस तरह की कृत्रिम तात्कालिकता पैदा करके तत्काल सुनवाई की सुविधा का उपयोग नहीं किया जा सकता। इसके अलावा, यह याचिका केवल एक शो-कॉज नोटिस को चुनौती देने के लिए दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने अदालत का रुख तब किया जब असेसमेंट 31 मार्च 2025 तक समय-सीमा समाप्त होने की कगार पर है।"

    गौरतलब है कि आयकर विभाग द्वारा जारी किए गए शो-कॉज नोटिस को प्राप्त करने वाला व्यक्ति इसे प्राप्त होने के तीन वर्षों के भीतर चुनौती दे सकता है। इस मामले में, नोटिस अप्रैल 2022 में जारी किया गया था, इसलिए अंबानी के पास इसे चुनौती देने के लिए केवल 31 मार्च तक का समय था। हालांकि, उन्होंने ऐसा अंतिम समय में किया।

    इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए, खंडपीठ ने अंबानी पर ₹25,000 का जुर्माना लगाया और आदेश दिया कि यह राशि टाटा मेमोरियल अस्पताल को दी जाए।

    1 अप्रैल को, सिनियर एडवोकेट रफीक दादा अंबानी की ओर से पेश हुए और पीठ को यह जानकारी दी कि आयकर विभाग पहले ही असेसमेंट ऑर्डर पारित कर चुका है। इसलिए, उन्होंने अदालत से याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। इस पर खंडपीठ ने याचिका को वापस लेने की अनुमति दे दी।

    Praveen Mishra

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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