बॉम्बे हाईकोर्ट: RTI के तहत निजी संस्था से जानकारी जुटाकर देना सार्वजनिक प्राधिकरण की जिम्मेदारी नहीं
Praveen Mishra
25 Aug 2026 4:48 PM IST

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) के तहत कोई सार्वजनिक प्राधिकरण निजी संस्था से जानकारी हासिल कर RTI आवेदक को उपलब्ध कराने के लिए बाध्य नहीं है। हालांकि, उसके पास आवेदन के समय जो जानकारी उपलब्ध है, उसे कानून के अनुसार देना उसकी जिम्मेदारी है।
जस्टिस मनीष पिताले और जस्टिस श्रीराम वी. शिरसाट की खंडपीठ ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) की ओर से दायर याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई की। याचिकाओं में केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के उन आदेशों को चुनौती दी गई थी, जिनमें SEBI को BSE से जानकारी प्राप्त कर RTI आवेदकों को देने का निर्देश दिया गया था।
क्या था मामला?
SEBI ने दलील दी कि एक सार्वजनिक प्राधिकरण के रूप में उसे RTI आवेदन मिलने पर उसके पास उपलब्ध जानकारी कानून के अनुसार देनी होती है। लेकिन उसे BSE जैसे किसी तीसरे पक्ष या निजी संस्था से जानकारी जुटाकर देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने RTI Act की धारा 2(f) का उल्लेख करते हुए कहा कि सार्वजनिक प्राधिकरण के पास किसी निजी निकाय से संबंधित जो जानकारी उपलब्ध है, उसे RTI के तहत दिया जा सकता है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि सार्वजनिक प्राधिकरण को किसी तीसरे पक्ष से नई जानकारी मंगाने की जिम्मेदारी भी दी जा सकती है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि RTI Act सार्वजनिक प्राधिकरण पर ऐसी जानकारी एकत्र या संकलित करने का दायित्व नहीं डालता, जो उसके पास पहले से उपलब्ध नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
हाईकोर्ट ने CBSE v. Aditya Bandopadhyay मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि RTI Act के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण को ऐसी जानकारी एकत्र या संकलित करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, जो उसके पास उपलब्ध नहीं है।
हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया कि बाद में CIC ने खुद कई मामलों में SEBI जैसे सार्वजनिक प्राधिकरणों को BSE जैसे तीसरे पक्ष से जानकारी हासिल कर RTI आवेदकों को देने का निर्देश देने से इनकार किया था।
CIC के आदेश रद्द
हाईकोर्ट ने कहा कि CIC के विवादित आदेशों में अपनाया गया तर्क कानून के अनुरूप नहीं था।
इसके साथ ही कोर्ट ने SEBI और BSE की याचिकाएं स्वीकार करते हुए CIC के संबंधित आदेशों को रद्द कर दिया।


