बॉम्बे हाईकोर्ट ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' के खिलाफ महेश जेठमलानी की पोस्ट हटाने का आदेश देने से इनकार किया
Shahadat
4 Nov 2026 9:20 AM IST

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार (2 नवंबर) को सीनियर वकील महेश जेठमलानी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पहले ट्विटर) पर 'द इंडियन एक्सप्रेस' अखबार के खिलाफ की गई अपनी दो कथित मानहानिकारक पोस्ट हटाने का निर्देश देने से फिलहाल इनकार किया।
जस्टिस आरिफ डॉक्टर ने सीनियर वकील ज़ाल अंध्यारुजिना (जो जेठमलानी की ओर से पेश हुए) के उस 'आश्वासन' पर ध्यान दिया, जिसमें कहा गया कि उनके मुवक्किल 27 और 28 सितंबर की उन दो पोस्ट को न तो 'रीट्वीट' करेंगे और न ही 'रीपोस्ट' करेंगे। इन पोस्ट में उन्होंने 'द इंडियन एक्सप्रेस' पर कांग्रेस पार्टी के प्रति 'पक्षपाती' होने और अपनी संपादकीय नीति के साथ 'समझौता' करने का आरोप लगाया था। सीनियर वकील ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (2026) और कर्नाटक विधानसभा चुनाव (2023) के दौरान कांग्रेस और इस मीडिया संस्थान के बीच कथित वित्तीय लेन-देन के बारे में भी पोस्ट किया।
गौरतलब है कि जेठमलानी ने ये कथित आपत्तिजनक पोस्ट तब की थीं, जब 'द इंडियन एक्सप्रेस' ने चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त के बीच कथित 'आंतरिक मतभेद' की खबर छापी थी। यह मामला मुख्य रूप से 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) से जुड़ा था।
अखबार ने इन पोस्ट को मानहानिकारक बताते हुए हाईकोर्ट में एक दीवानी मुकदमा (सिविल सूट) दायर किया और इन पोस्ट को हटाने के लिए एक अंतरिम आदेश (इन्जंक्शन) की मांग की।
मीडिया संस्थान के मुकदमे का विरोध करते हुए अंध्यारुजिना ने बताया कि उनके मुवक्किल ने उन दो पोस्ट के बाद कम से कम 45 और पोस्ट की हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई उन पोस्ट को देखना चाहे जिन्हें वादी 'मानहानिकारक' बता रहा है, तो उसे जेठमलानी के 'X' हैंडल पर काफी नीचे तक स्क्रॉल करना पड़ेगा।
इस दलील का जवाब देते हुए मीडिया ग्रुप के सीनियर वकील दिन्यार मैडन ने बेंच से आग्रह किया कि कम से कम इन पोस्ट के कुछ हिस्सों को हटाने के लिए कोई अंतरिम आदेश दिया जाए, क्योंकि जेठमलानी कभी भी इन आपत्तिजनक पोस्ट को 'रीट्वीट' या 'रीपोस्ट' कर सकते हैं। इसके बाद जस्टिस डॉक्टर ने अंध्यारुजिना से पूछा कि क्या जेठमलानी के उन पोस्ट्स को दोबारा पब्लिश, पोस्ट या रीट्वीट करने की संभावना है। इस पर उन्हें नकारात्मक जवाब मिला।
जस्टिस डॉक्टर ने कहा,
"उनके बयान को स्वीकार किया जाता है। मेरी राय में इस अंतरिम चरण में वादी (Plaintiff) को पर्याप्त सुरक्षा मिल जाएगी।"
हालांकि, जब मैडॉन ने उन पोस्ट्स के कुछ खास हिस्सों को हटाने पर जोर दिया, तो अंध्यारुजिना ने कहा कि उनके मुवक्किल जो कुछ भी ट्वीट किया गया है, उसे सही ठहराने के लिए कुछ सामग्री रिकॉर्ड पर रखना चाहते हैं और वे इसे एक हलफनामे (Affidavit) के जरिए पेश करेंगे।
जज ने अपने आदेश में लिखा,
"चूंकि इसमें विस्तृत सुनवाई की जरूरत होगी - जिसमें अन्य बातों के अलावा, ट्वीट को सही ठहराने के तर्कों और मुकदमे की स्वीकार्यता (Maintainability) पर विचार करना शामिल है - इसलिए बेहतर होगा कि सभी पक्ष अपनी दलीलें (Pleadings) पूरी कर लें, और उसके बाद ही इस अंतरिम आवेदन (Interim Application) पर अंतिम सुनवाई करके इसका निपटारा किया जाए। प्रतिवादियों (Defendants) को छूट दी जाती है कि वे 20 नवंबर, 2026 तक या उससे पहले अंतरिम आवेदन के जवाब में एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करें और उसकी प्रति दूसरी पक्ष को दें। यदि कोई जवाबी हलफनामा (Rejoinder) देना हो, तो उसे 25 नवंबर, 2026 तक दाखिल किया जा सकता है।"
इसलिए इस मामले की सुनवाई 27 नवंबर, 2026 तक के लिए टाल दी गई।
Case Title : The Indian Express vs Mahesh Ram Jethmalani

