यह दावा कि बेटी ने पढ़ाई बंद करने पर पिता पर बलात्कार का झूठा आरोप लगाया, 'दूर की कौड़ी': बॉम्बे हाईकोर्ट ने POCSO सजा बरकरार रखी

Amir Ahmad

11 March 2026 11:37 AM IST

  • यह दावा कि बेटी ने पढ़ाई बंद करने पर पिता पर बलात्कार का झूठा आरोप लगाया, दूर की कौड़ी: बॉम्बे हाईकोर्ट ने POCSO सजा बरकरार रखी

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि लड़की अपने पिता पर बलात्कार जैसा गंभीर आरोप सिर्फ इस आशंका पर नहीं लगाएगी कि वह उसकी पढ़ाई बंद कर देगा और उसकी शादी कर देगा, जबकि उसने अपनी ही नाबालिग बेटी से बलात्कार के लिए दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति द्वारा उठाए गए गलत फंसाने का सिद्धांत खारिज किया।

    जस्टिस मनीष पिटाले और जस्टिस श्रीराम शिरसाट की खंडपीठ ने मुंबई के स्पेशल कोर्ट का 12 मार्च, 2020 का आदेश बरकरार रखा, जिसमें एक व्यक्ति को अपनी नाबालिग बेटी के साथ लगातार बलात्कार करने का दोषी ठहराया गया और उसे उसके शेष प्राकृतिक जीवन तक सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई।

    स्पेशल कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली अपनी अपील में व्यक्ति ने अन्य आधारों के अलावा तर्क दिया कि उसने अपनी बड़ी बेटी की शादी कर दी थी, जिसके कारण उसे अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी लेकिन पीड़िता जो आगे पढ़ना चाहती थी को डर था कि उसके पिता उसकी पढ़ाई भी बंद करा सकते हैं। इसलिए गुस्से में आकर उसने अपने पिता पर आरोप लगा दिए, क्योंकि वह अपने पिता से परेशान थी।

    जजों ने 9 मार्च को सुनाए गए आदेश में कहा,

    "यह कहा गया कि पीड़िता को डर था कि उसकी पढ़ाई भी अचानक बंद हो जाएगी और वह पढ़ना चाहती थी। इस पृष्ठभूमि में अपने पिता के प्रति गुस्से के कारण उसने उनके खिलाफ इस तरह का झूठा मामला रचा। हम पाते हैं कि अपीलकर्ता की ओर से पेश की गई यह थ्योरी स्वीकार नहीं की जा सकती। कारण यह है कि एक बच्चा अपने माता-पिता से नाराज हो सकता है जैसा कि तब होता है, जब माता-पिता अपने बच्चे को अनुशासित करना चाहते हैं। हालांकि, यह स्वीकार करना बहुत दूर की बात होगी कि केवल इसी कारण से पीड़िता ने अपने ही पिता के खिलाफ इतने गंभीर कठोर और दूरगामी आरोप लगाए। हम अपीलकर्ता की ओर से पेश की गई इस थ्योरी को स्वीकार करने से इनकार करते हैं।"

    अभियोजन पक्ष के मामले के अनुसार 27 जुलाई, 2018 को म्युनिसिपल स्कूल में जहां पीड़िता पढ़ती थी, एक पुलिस दीदी कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रोग्राम में पीड़िता जो उस समय 10वीं क्लास में पढ़ती थी। हिम्मत करके काउंसलर से मिली और फिर स्कूल प्रिंसिपल और काउंसलर के साथ मिलकर अपने ही पिता के खिलाफ FIR दर्ज कराई।

    अपनी शिकायत में लड़की ने आरोप लगाया कि उसके पिता, जो एक राजमिस्त्री हैं जब वह 10 साल की थी तब से उसे गलत तरीके से' छू रहे थे। जब उसने इसकी शिकायत अपनी माँ जो एक मेड सर्वेंट है से की तो कोई रिएक्शन नहीं हुआ। उसने आरोप लगाया कि शिकायत दर्ज करने से तीन महीने पहले पिता ने हदें पार कीं और कम से कम चार बार उसका सेक्शुअल असॉल्ट किया।

    इसके बाद अपील करने वाले को स्पेशल कोर्ट ने इंडियन पीनल कोड (IPC) और कड़े प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्शुअल ऑफेंस (POCSO Act) के तहत गिरफ्तार किया और दोषी ठहराया।

    अपनी अपील में अपील करने वाले ने कई दलीलें दीं, लेकिन बेंच को इन दलीलों में कोई दम नहीं मिला और हर एक को खारिज कर दिया।

    जज ने कहा,

    "वर्तमान मामले में अपीलकर्ता पीड़िता का पिता होने के नाते भले ही अपीलकर्ता की ओर से उठाया गया तर्क कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि पीड़िता नाबालिग थी केवल तर्कों के लिए स्वीकार कर लिया जाए, हम पाते हैं कि पिता होने के नाते अपीलकर्ता स्पष्ट रूप से पीड़िता पर विश्वास और अधिकार की स्थिति में था। उसने उसके साथ बलात्कार किया। इसलिए वर्तमान मामले में अपराध के तत्व स्पष्ट रूप से सामने आते हैं और ट्रायल कोर्ट ने दोषसिद्धि का निष्कर्ष निकालने और अपीलकर्ता को उक्त तरीके से सजा सुनाने में कोई गलती नहीं की।"

    इन टिप्पणियों के साथ पीठ ने अपील खारिज की।

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