धार्मिक जुलूसों में पटाखे, लेजर लाइट और तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम पर रोक, मंडलों को देना होगा ₹1 लाख तक का सिक्योरिटी डिपॉजिट: बॉम्बे हाईकोर्ट
Praveen Mishra
23 Sept 2026 5:46 PM IST

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में धार्मिक जुलूसों और उत्सवों के दौरान होने वाले ध्वनि एवं वायु प्रदूषण को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने सार्वजनिक सड़कों और अन्य स्थानों पर धार्मिक जुलूसों के दौरान पटाखे फोड़ने, लेजर लाइट, हाई-इंटेंसिटी लाइट और तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम के इस्तेमाल पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि त्योहारों को अधिक गरिमापूर्ण और सभ्य तरीके से मनाने की जरूरत है।
जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की डिवीजन बेंच ने कहा कि मुंबई, ठाणे, पुणे और नासिक जैसे घनी आबादी वाले शहरों में नागरिकों को तेज आवाज के उल्लंघनों का खामियाजा भुगतना पड़ता है। कोर्ट ने कहा कि हाई-वॉटेज स्पीकर, साउंड सिस्टम, लाउडस्पीकर, ढोल-ताशे और अन्य तेज आवाज वाले उपकरणों के इस्तेमाल पर पूरी तरह नियंत्रण जरूरी है।
पटाखों पर पूरी तरह रोक
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सड़कों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर उत्सवों के दौरान पटाखे फोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। अधिकारियों को इस निर्देश को लागू करने और पटाखों से होने वाले वायु एवं ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।
इसके अलावा धार्मिक जुलूसों और उत्सवों में लेजर लाइट, हाई-इंटेंसिटी ल्यूमेन लाइट और बीम के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई गई है। पुलिस और संबंधित अधिकारियों को ध्वनि प्रदूषण के डेसिबल स्तर की जांच करने तथा बिना लाइसेंस या अनधिकृत साउंड सिस्टम के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। उल्लंघन होने पर संबंधित उपकरणों को जब्त और सीज करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
आयोजकों के लिए डेसिबल मीटर अनिवार्य
हाईकोर्ट ने धार्मिक जुलूसों और कार्यक्रमों के आयोजकों के लिए 'डेसिबल मेजरमेंट मीटर' लगाना अनिवार्य किया है। इसे ऐसी जगह प्रदर्शित करना होगा जहां अधिकारी ध्वनि स्तर को देख और रिकॉर्ड कर सकें।
इसके अलावा आयोजकों को यह अंडरटेकिंग भी देनी होगी कि इस्तेमाल किए जाने वाले साउंड सिस्टम में इंटरनल साउंड लिमिटर लगा होगा।
मंडलों को देना होगा कम से कम ₹1 लाख का सिक्योरिटी डिपॉजिट
कोर्ट ने धार्मिक आयोजकों और मंडलों के लिए सिक्योरिटी डिपॉजिट की व्यवस्था पर भी निर्देश दिए हैं। एसोसिएशन या समूह के मामले में कम से कम ₹1 लाख, जबकि किसी व्यक्ति के मामले में कम से कम ₹50,000 का डिपॉजिट लिया जा सकता है।
यदि आयोजक निर्धारित डेसिबल सीमा का उल्लंघन करते हैं तो यह राशि जब्त की जा सकेगी। इसके अलावा कानून के तहत अन्य कार्रवाई भी की जा सकती है। आयोजकों को कार्यक्रम की अनुमति को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना होगा और जिम्मेदार व्यक्तियों के नाम, पते और मोबाइल नंबर भी प्रदर्शित करने होंगे, ताकि उल्लंघन होने पर जवाबदेही तय की जा सके।
एक ही इलाके में कई जुलूसों की अनुमति देने से पहले 'क्यूम्युलेटिव इम्पैक्ट' देखना होगा
हाईकोर्ट ने अधिकारियों से कहा है कि एक ही वार्ड में कई आयोजनों या जुलूसों की अनुमति देते समय कुल मिलाकर होने वाले ध्वनि प्रदूषण (cumulative impact) का वैज्ञानिक और व्यवस्थित आकलन किया जाए।
कोर्ट ने कहा कि इस तरह का आकलन किए बिना अनुमति दिए जाने से Noise Pollution Rules का उल्लंघन हो सकता है। साथ ही नागरिकों से भी ध्वनि एवं वायु प्रदूषण के संबंध में व्यक्तिगत और सामूहिक जिम्मेदारी निभाने की अपेक्षा की गई है।
नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई
कोर्ट ने कहा कि Noise Pollution (Regulation and Control) Rules, 2000, Environment (Protection) Act, 1986, Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 और Explosives Act, 1884 के तहत उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बेंच ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण नियमों का उल्लंघन नागरिकों के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के समान है और संबंधित अधिकारियों को कानून तथा कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करनी होगी।
बुजुर्गों, बीमार लोगों और छात्रों पर असर को लेकर चिंता
कोर्ट ने कहा कि तेज आवाज का प्रभाव वरिष्ठ नागरिकों, बीमार लोगों, परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों और बच्चों पर गंभीर हो सकता है। बेंच ने कहा कि धार्मिक आयोजनों के नाम पर नागरिकों के अधिकारों और स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
पटाखों से होने वाले वायु प्रदूषण और संभावित दुर्घटनाओं पर भी कोर्ट ने चिंता जताई। बेंच ने कहा कि सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने से पैदल चलने वाले लोगों और वाहनों के लिए खतरा पैदा हो सकता है। कोर्ट ने पटाखों से निकलने वाले धुएं की विषाक्तता को भी गंभीर चिंता का विषय बताया।
'त्योहार है इसलिए नियम लागू नहीं होंगे' वाली धारणा स्वीकार्य नहीं
कोर्ट ने कहा कि केवल इसलिए कि कोई त्योहार या धार्मिक आयोजन हो रहा है, Noise Pollution Rules का पालन करने की बाध्यता समाप्त नहीं हो जाती। बेंच ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि ध्वनि प्रदूषण से जुड़े कानूनी प्रावधान मौजूद होने के बावजूद उनका प्रभावी तरीके से पालन नहीं हो रहा है।
कोर्ट ने अधिकारियों को आयोजकों को उनके सामाजिक दायित्वों और निर्धारित डेसिबल मानकों के बारे में जागरूक करने का निर्देश दिया है।
मामले में कोर्ट ने अनुपालन रिपोर्ट के लिए अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को निर्धारित की है।

