मुंबई पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ 141 वकीलों का बयान, शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर रोक हटाने की मांग

Praveen Mishra

23 July 2026 3:40 PM IST

  • मुंबई पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ 141 वकीलों का बयान, शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर रोक हटाने की मांग

    बॉम्बे हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले 141 अधिवक्ताओं ने मुंबई पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई और पूरे शहर में लागू निषेधाज्ञा (Prohibitory Orders) की आलोचना करते हुए इन्हें वापस लेने की मांग की है।

    उनका कहना है कि ये आदेश नागरिकों के शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने के संवैधानिक अधिकार का अनुचित हनन करते हैं।

    संयुक्त बयान में कहा गया है कि 20 जुलाई को शिवाजी पार्क के आसपास शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे 300 से अधिक लोगों, जिनमें नाबालिग भी शामिल थे, को पुलिस ने हिरासत में लिया।

    यह कार्रवाई कथित तौर पर चैत्यभूमि पर प्रदर्शन की अनुमति न होने के आधार पर की गई।

    इस बयान पर सीनियर एडवोकेट जनक द्वारकादास, नवरोज़ सीरवाई, गायत्री सिंह, मिहिर देसाई, हरेश जगतियानी, युग मोहित चौधरी, दिनयार मदोन, आरती राघवन सहित 141 वकीलों ने हस्ताक्षर किए हैं।

    वकीलों ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(b) के तहत शांतिपूर्ण सभा का अधिकार संरक्षित है और बिना पर्याप्त कारण के व्यापक प्रतिबंध नहीं लगाए जा सकते।

    उन्होंने महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 37(3) के तहत जारी निषेधाज्ञाओं की वैधता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि लगातार दो आदेश जारी कर 15 दिनों की वैधानिक सीमा को दरकिनार करने का प्रयास किया गया है।

    बयान में मुंबई पुलिस आयुक्त से निषेधाज्ञा वापस लेने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई से परहेज करने की अपील की गई है।

    वकीलों का कहना है कि नागरिकों को ऐसे आदेशों को चुनौती देने के लिए अनावश्यक रूप से अदालतों का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।

    गौरतलब है कि इससे पहले बॉम्बे बार एसोसिएशन, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की आलोचना कर चुके हैं।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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