उमर और शरजील रिहाई के नारे लगाने के आरोपी पूर्व TISS छात्र को हाईकोर्ट ने दी गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा

Shahadat

14 Aug 2026 8:07 PM IST

  • उमर और शरजील रिहाई के नारे लगाने के आरोपी पूर्व TISS छात्र को हाईकोर्ट ने दी गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार (14 अगस्त) को TISS के पूर्व छात्र कामाख्या प्रसाद दास को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दी। उन पर "उमर खालिद और शरजील इमाम को रिहा करने" के लिए नारे लगाने का आरोप है।

    जस्टिस प्रफुल्ल खुबालकर ने दास की अग्रिम ज़मानत की याचिका पर 31 अगस्त को सुनवाई करने पर सहमति जताई और इस बीच उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दी।

    गौरतलब है कि पिछले हफ्ते मुंबई की एक अदालत ने दास और एक अन्य छात्र अभिस्वरूप पॉल की अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज की। इन दोनों को जीएन साईबाबा को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

    पुलिस का दावा है कि इस कार्यक्रम के दौरान दोनों छात्रों ने इमाम और खालिद की रिहाई के लिए नारे लगाए।

    एडिशनल सेशन जज वीबी बोहरा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने शरजील इमाम और उमर खालिद की ज़मानत याचिका खारिज की थी, इसलिए छात्रों को देश के कानून का सम्मान करना चाहिए।

    अदालत ने अभिस्वरूप पॉल (32) और कामाख्या प्रसाद दास (23) को ज़मानत देने से इनकार किया। मुंबई पुलिस ने अक्टूबर 2025 में साईबाबा को श्रद्धांजलि देने के कार्यक्रम में शामिल होने और उनकी कविताएं पढ़ने व शरजील और उमर की रिहाई के लिए नारे लगाने के आरोप में कई अन्य छात्रों के साथ इनके खिलाफ भी FIR दर्ज की थी।

    हालांकि, अदालत ने निकिता डिसूजा, उत्कर्ष खुंटिया, यश कौंडिल्य, अवंतिका और इशप्रीत कौर को अग्रिम ज़मानत दी। हालांकि छात्रों का तर्क था कि साईबाबा को UAPA मामले में बरी कर दिया गया और सिर्फ़ "शरजील को रिहा करो, उमर को रिहा करो" कहने से कोई अपराध नहीं बनता।

    लेकिन जज ने कहा,

    "इसमें कोई शक नहीं कि जीएन साईबाबा उन पर लगे आरोपों से बरी हो गए, इसलिए आरोपियों का उन्हें सम्मान देना गैर-कानूनी नहीं कहा जा सकता। हालांकि, आरोपियों का काम सिर्फ़ उन्हें सम्मान देने तक ही सीमित नहीं था। उन्होंने कथित तौर पर उमर खालिद और शरजील इमाम को जेल से रिहा करने के नारे भी लगाए, जिन पर UAPA यानी देश के खिलाफ गैर-कानूनी गतिविधियों के तहत मुकदमा चल रहा है। यह ऐसे नारे लगाने का मंच नहीं था। दूसरे शब्दों में ऐसे नारे किसी सार्वजनिक आंदोलन या जुलूस में नहीं लगाए गए। सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की ज़मानत अर्ज़ियां खारिज कर दी थीं। छात्र होने के नाते आरोपियों से देश के कानून का सम्मान करने की उम्मीद की जाती थी।"

    Case title: Kamakhya Prasad Das v/s State of Maharashtra

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