गोवा SIR के दौरान वोटर लिस्ट से हटाए गए परिवार के 6 सदस्यों के नाम 10 दिन में जोड़ें: बॉम्बे हाईकोर्ट का ECI को निर्देश
Praveen Mishra
5 Nov 2026 6:59 PM IST

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार (5 नवंबर) को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को निर्देश दिया कि गोवा में हाल ही में पूरी हुई विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) प्रक्रिया के दौरान अंतिम मतदाता सूची से हटाए गए एक परिवार के छह सदस्यों के नाम दोबारा शामिल किए जाएं।
जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित जामसंडेकर की खंडपीठ ने गोवा के सांताक्रूज निर्वाचन क्षेत्र के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को निर्देश दिया कि वह आज से 10 दिनों के भीतर याचिकाकर्ताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल करें।
खंडपीठ ने कहा कि वह ECI की इस दलील को स्वीकार नहीं करती कि SIR का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण मौजूदा याचिका पर सुनवाई टाल दी जानी चाहिए।
कोर्ट ने कहा, “हम याचिका स्वीकार करते हैं... हमने ECI की इस दलील को खारिज कर दिया है कि मौजूदा याचिका पर सुनवाई स्थगित की जाए, क्योंकि SIR का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। यह मामला SIR से संबंधित नहीं है... इसलिए हमने सांताक्रूज निर्वाचन क्षेत्र के BLO को निर्देश दिया है कि वह आज से 10 दिनों के भीतर याचिकाकर्ताओं के नाम जोड़ें।”
खंडपीठ ने ECI की ओर से इस आदेश पर दो सप्ताह तक रोक लगाने की मांग भी खारिज कर दी।
क्या था मामला?
यह याचिका सालगांवकर परिवार की ओर से दायर की गई थी। परिवार ने दावा किया कि उन्होंने अपना पता बदलने के लिए फॉर्म 8 जमा किया था, लेकिन इसके बावजूद उनके नाम मतदाता सूची के ड्राफ्ट से हटा दिए गए।
वहीं, निर्वाचन आयोग ने दलील दी कि SIR के दिशा-निर्देशों के तहत फॉर्म 8 के साथ पहले से भरा हुआ एन्यूमरेशन फॉर्म (Enumeration Form) जमा करना अनिवार्य है।
आयोग के अनुसार, याचिकाकर्ताओं ने एन्यूमरेशन फॉर्म जमा करने से इनकार कर दिया था। इसलिए उन्हें मतदाता सूची में नए सिरे से नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म 6 भरने को कहा गया।
हाईकोर्ट ने ECI की दलील पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान पीठ ने आयोग की दलील पर आपत्ति जताई। कोर्ट ने कहा कि एन्यूमरेशन फॉर्म के साथ एक घोषणा भी जुड़ी होती है, जिसमें मतदाता को यह बताना होता है कि वह मौजूदा मतदाता सूची में दर्ज पते पर ही रह रहा है।
कोर्ट ने सवाल किया कि यदि किसी मतदाता ने अपना निवास स्थान बदल लिया है, तो उससे ऐसी घोषणा करने की अपेक्षा कैसे की जा सकती है, जो वास्तविकता के विपरीत हो।
जस्टिस मेनेजेस ने कहा कि यदि कोई मतदाता अपना पता बदलने के लिए फॉर्म 8 लेकर आता है, तो उसे यह नहीं कहा जा सकता कि उसका नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं है और अब उसे नए मतदाता के रूप में नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म 6 भरना होगा।
खंडपीठ ने कहा कि जब मतदाता का नाम पहले से ही मौजूदा सूची में है और वह केवल अपना पता बदलना चाहता है, तो उसे अनिवार्य रूप से एन्यूमरेशन फॉर्म जमा करने के लिए बाध्य क्यों किया जा रहा है?
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति अब उस पते पर नहीं रहता, जो मौजूदा मतदाता सूची में दर्ज है, तो उससे यह घोषणा करने के लिए नहीं कहा जा सकता कि वह अभी भी वहीं रह रहा है।
खंडपीठ ने टिप्पणी की कि किसी नागरिक को गलत घोषणा करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता और किसी भी नागरिक के लिए एन्यूमरेशन फॉर्म पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य नहीं बनाया जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नियम 12 का भी उल्लेख किया और सवाल किया कि जब इस नियम के तहत आपत्तियां और अन्य प्रक्रियाएं उपलब्ध हैं, तो नागरिक को सीधे फॉर्म 8 जमा करने की अनुमति क्यों नहीं दी जा सकती।

