'एक भी छात्र की जान नहीं जानी चाहिए': हाईकोर्ट ने पुणे में 15 दिन से भूख हड़ताल कर रहे आदिवासी छात्रों के लिए मेडिकल सुविधा का निर्देश दिया

Shahadat

29 Aug 2026 8:20 PM IST

  • एक भी छात्र की जान नहीं जानी चाहिए: हाईकोर्ट ने पुणे में 15 दिन से भूख हड़ताल कर रहे आदिवासी छात्रों के लिए मेडिकल सुविधा का निर्देश दिया

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने शनिवार को महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया कि वह पुणे में पिछले 15 दिनों से भूख हड़ताल कर रहे आदिवासी छात्रों के लिए तुरंत मेडिकल सुविधा सुनिश्चित करे। यह निर्देश तब दिया गया, जब कोर्ट को बताया गया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों में से एक की तबीयत बिगड़ गई।

    एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे ने कहा,

    "हम नहीं चाहते कि किसी भी छात्र की जान जाए।"

    जस्टिस गौतम अंखाड के साथ मिलकर बनी डिवीजन बेंच ने इस मामले पर तुरंत सुनवाई की।

    बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह प्रदर्शन कर रहे छात्रों को उचित मेडिकल सुविधाएँ दे और ज़रूरत पड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराए। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि जहां भी ज़रूरी हो, छात्रों को खाना उपलब्ध कराया जाए।

    कोर्ट ने उन हालात पर भी ध्यान दिया, जिनकी वजह से आदिवासी छात्रों को भूख हड़ताल शुरू करनी पड़ी; इनमें एक आदिवासी आश्रम स्कूल में खाना खाने के बाद कथित तौर पर फूड पॉइज़निंग से एक छात्र की मौत और सांप के काटने से तीन छात्रों की मौत की घटना शामिल है।

    पुणे में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा सुविधाओं की मांग को लेकर आदिवासी छात्रों के चल रहे विरोध प्रदर्शन के बारे में कोर्ट को जानकारी मिलने के बाद यह मामला बेंच के सामने उठाया गया।

    एडवोकेट जनरल डॉ. मिलिंद साठे ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार प्रदर्शन कर रहे छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी ज़रूरी कदम उठा रही है।

    इस बात पर ध्यान देते हुए बेंच ने कहा कि सबसे ज़रूरी बात यह है कि छात्रों की सेहत और सुरक्षा से कोई समझौता न हो।

    एक्टिंग चीफ जस्टिस घुगे ने कहा,

    "एडवोकेट जनरल ने हमें राज्य सरकार द्वारा की गई तेज़ी से कार्रवाई के बारे में बताया।"

    इसके बावजूद, कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि जब तक मामले पर आगे विचार नहीं किया जाता, तब तक छात्रों के लिए उचित मेडिकल सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएं।

    बेंच ने उन शिकायतों पर भी ध्यान दिया, जिनकी वजह से छात्रों को भूख हड़ताल शुरू करनी पड़ी थी।

    कोर्ट को बताया गया कि छात्र आदिवासी छात्रों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।

    कोर्ट के सामने जिन हालात का ज़िक्र किया गया, उनमें एक आदिवासी आश्रम स्कूल में खाना खाने के बाद फूड पॉइज़निंग से एक छात्र की मौत शामिल थी। कोर्ट को सांप के काटने से तीन छात्रों की मौत की घटना के बारे में भी बताया गया।

    बेंच ने निर्देश दिया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों को मेडिकल सुविधा दी जाए और ज़रूरत पड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया जाए। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि छात्रों के जारी विरोध-प्रदर्शन के बावजूद, ज़रूरत पड़ने पर उन्हें खाना उपलब्ध कराया जाए।

    निर्देश दिया गया कि इस PIL को सोमवार को डिवीज़न बेंच के सामने आगे की सुनवाई के लिए सबसे पहले लिस्ट किया जाए।

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