BCI नियम वकीलों को अपने परिवार के सदस्यों की पैरवी करने से नहीं रोकते: बॉम्बे हाईकोर्ट
Praveen Mishra
29 July 2026 3:32 PM IST

बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के नियम किसी अधिवक्ता को अपने परिवार के सदस्यों की ओर से अदालत में पेश होने से नहीं रोकते।
अदालत ने कहा कि BCI Rules के Rule 6 का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि कोई अधिवक्ता उस अदालत, न्यायाधिकरण या प्राधिकरण के समक्ष पेश न हो, जहां उसका कोई निर्दिष्ट रिश्तेदार न्यायनिर्णायक (Adjudicatory Body) का सदस्य हो।
जस्टिस राजेश एस. पाटिल ने यह टिप्पणी एक बेदखली (Eviction) विवाद से संबंधित याचिका की सुनवाई के दौरान की। सुनवाई के दौरान एक पक्ष ने आपत्ति उठाई कि एक अधिवक्ता अपने ही परिवार के सदस्य की ओर से अदालत में पेश नहीं हो सकता।
आपत्ति के समर्थन में Advocates Act, 1961 की धारा 49(1)(c) के तहत बनाए गए Bar Council of India Standards of Professional Conduct and Etiquette के Rule 6 का हवाला दिया गया। हालांकि, अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
हाईकोर्ट ने कहा कि Rule 6 का स्पष्ट अर्थ यह है कि कोई अधिवक्ता उस अदालत, ट्रिब्यूनल या प्राधिकरण के समक्ष पेश नहीं हो सकता, जहां उसका कोई निर्दिष्ट रिश्तेदार सदस्य हो।
लेकिन इस नियम का यह अर्थ नहीं निकाला जा सकता कि अधिवक्ता अपने परिवार के सदस्यों की ओर से किसी भी कानूनी कार्यवाही में पैरवी नहीं कर सकता।
अदालत ने कहा कि नियम की व्याख्या का दायरा केवल ऐसे मामलों तक सीमित है जहां हितों के टकराव (Conflict of Interest) की संभावना हो।
इसलिए, अपने रिश्तेदार या परिवार के सदस्य का वकील बनकर अदालत में पेश होना BCI नियमों का उल्लंघन नहीं है।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील द्वारा उठाई गई आपत्ति को खारिज कर दिया।


