IT नियमों और 'सहयोग पोर्टल' के खिलाफ कुणाल कामरा की याचिका पर सुनवाई अनिश्चित काल के लिए स्थगित
Shahadat
12 Sept 2026 9:23 AM IST

बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार (11 सितंबर) को कॉमेडियन कुणाल कामरा और सीनियर एडवोकेट हरेश जगतियानी की उन याचिकाओं पर सुनवाई अनिश्चित काल के लिए स्थगित, जिनमें 'सहयोग पोर्टल' और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स, 2021 के नियम 3(1)(d) में 2025 के संशोधन की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है।
चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की डिवीजन बेंच ने गौर किया कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इसी मुद्दे पर बॉम्बे और कर्नाटक हाईकोर्ट में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाई थी, इसलिए मामले की सुनवाई अनिश्चित काल के लिए टाल दी गई।
कामरा ने उन प्रावधानों को चुनौती दी है, जो सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज पर पोस्ट किए गए कंटेंट को ब्लॉक करने की अनुमति देते हैं। इससे पहले, कर्नाटक हाईकोर्ट ने 'X Corp' की चुनौती पर कहा कि सहयोग पोर्टल सेंसरशिप का जरिया नहीं है, बल्कि यह सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज और सरकारी एजेंसियों के बीच सहयोग सुनिश्चित करता है।
कामरा का तर्क था कि यह सिस्टम कंटेंट ब्लॉक करने का एक समानांतर ढांचा बनाता है, जो इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 की धारा 69A के तहत अनिवार्य प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों को दरकिनार करता है। उन्होंने तर्क दिया कि सहयोग पोर्टल यूजर को पहले से सूचना दिए बिना ऑनलाइन कंटेंट को ब्लॉक करने की अनुमति देता है, जिससे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी का उल्लंघन होता है।
इसके अलावा, कामरा ने तर्क दिया कि नियम 3(1)(d) और सहयोग पोर्टल पूरी तरह से गैर-कानूनी और IT Act के अधिकार क्षेत्र से बाहर (अल्ट्रा वायर्स) हैं, और श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ [2015 (5) SCC 1] मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नियम 3(1)(d) और सहयोग पोर्टल दोनों ही IT Act की धारा 79(3)(b) से आधार नहीं ले सकते, क्योंकि IT एक्ट की धारा 79 एक छूट देने वाला प्रावधान है।
याचिका में कहा गया कि नियम 3(1)(d) और सहयोग पोर्टल, IT Act की धारा 69A और ब्लॉकिंग नियमों के समानांतर एक 'टेकडाउन' व्यवस्था बनाते हैं, जिसमें कानूनी रूप से अनिवार्य सुरक्षा उपाय नहीं हैं, इसलिए यह स्पष्ट रूप से मनमाना है। यह तर्क भी दिया गया कि नियम 3(1)(d) और सहयोग पोर्टल, संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(g) का खुला उल्लंघन करते हैं और संविधान के अनुच्छेद 19(2) और 19(6) में बताए गए अपवादों के दायरे में नहीं आते हैं।
Case details: Kunal Kamra vs Union of India [WP (L) No. 4061 of 2026]


