भीमा कोरेगांव केस: आरोपी महेश राउत ने इलाज के लिए केरल जाने की इजाज़त के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट में अर्ज़ी दी
Shahadat
8 July 2026 9:57 AM IST

भीमा कोरेगांव-एल्गार परिषद मामले के आरोपियों में से एक महेश राउत ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अर्ज़ी देकर केरल में आयुर्वेदिक इलाज के लिए जाने की इजाज़त मांगी। इससे पहले, इस साल जनवरी में एक स्पेशल NIA कोर्ट ने उनकी ऐसी ही अर्ज़ी खारिज की थी।
राउत ने शहर की स्पेशल NIA कोर्ट के 21 जनवरी, 2026 के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें 29 जनवरी से 7 फरवरी तक केरल के पूनथोट्टम आयुर्वेदाश्रम जाने की उनकी अर्ज़ी खारिज कर दी गई। वह अपने रूमेटाइड आर्थराइटिस और सोग्रेन सिंड्रोम के इलाज के लिए आयुर्वेदिक आश्रम जाना चाहते थे। उन्होंने कोर्ट से अपनी ज़मानत की शर्त में ढील देने का अनुरोध किया, जिसके तहत उन्हें मुंबई से बाहर जाने की मनाही थी।
हालांकि, स्पेशल कोर्ट के सामने NIA के कड़े विरोध के बाद उनकी अर्ज़ी खारिज कर दी गई। अब राउत ने इस आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि सही मेडिकल मदद पाना उनका अधिकार है, इसलिए शर्त में ढील दी जा सकती है, क्योंकि पहले भी उन्हें स्वास्थ्य समस्याओं के कारण कुछ समय के लिए ठाणे में रहने की इजाज़त दी गई।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने सितंबर 2024 में मुंबई के सिद्धार्थ लॉ कॉलेज को राउत को छात्र के तौर पर दाखिला देने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा कि जेल में होने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति की आगे की पढ़ाई करने का अधिकार खत्म हो जाता है।
राउत वन अधिकार कार्यकर्ता हैं। उन पर 2018 की भीमा कोरेगांव हिंसा के सिलसिले में कथित माओवादी संबंधों के कारण 'गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम 1967' की धारा 15 के तहत 'आतंकवादी कृत्य' में शामिल होने का आरोप है। सितंबर 2023 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें ज़मानत दी थी, क्योंकि शुरुआती तौर पर उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला था।
हालांकि, हाईकोर्ट ने ही ज़मानत आदेश पर रोक लगा दी थी और सुप्रीम कोर्ट ने इस रोक को आगे बढ़ा दिया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें मेडिकल आधार पर अंतरिम ज़मानत दी थी। ज़मानत की अवधि खत्म होने के बाद राउत वापस हिरासत में चले गए।
राउत की अर्ज़ी पर उचित समय पर सुनवाई होगी।


