कपड़े-बर्तन धुलवाने पर बहू ने ससुराल वालों पर किया केस, हाईकोर्ट ने कहा- IPC की धारा 498A के तहत यह क्रूरता नहीं

  • कपड़े-बर्तन धुलवाने पर बहू ने ससुराल वालों पर किया केस, हाईकोर्ट ने कहा- IPC की धारा 498A के तहत यह क्रूरता नहीं

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक परिवार के छह सदस्यों के खिलाफ FIR रद्द करते हुए कहा कि ससुराल वालों का बहू से कपड़े और बर्तन धोने जैसे घर के काम करवाना भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498-A के तहत क्रूरता नहीं माना जाएगा और इस आरोप पर उन पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

    कोल्हापुर बेंच में बैठे जस्टिस अभय मंत्री ने शिकायतकर्ता महिला के उस आरोप पर गौर किया, जिसमें कहा गया कि उसका पति उसे कल्याण-बदलापुर में अपनी एक बहन (शिकायतकर्ता की ननद) के घर ले गया था, जहाँ उससे घर के काम करने के लिए कहा गया। जज को इन आरोपों में कोई आधार नहीं मिला, क्योंकि 2025 में दर्ज FIR में नामजद सास-ससुर, ननद या देवर/जेठ की कोई खास भूमिका नहीं बताई गई।

    जस्टिस मंत्री ने कहा,

    "आरोपों को देखने पर ऐसा नहीं लगता कि FIR में याचिकाकर्ताओं की कोई खास भूमिका बताई गई कि उन्होंने क्या किया था; बल्कि, आरोप सामान्य और अस्पष्ट हैं। दूसरा आरोप, जिस पर अभियोजन पक्ष जोर देता है, वह यह है कि शिकायतकर्ता की एक ननद, जिसके घर उसका पति उसे ले गया था, ने उसे बदलापुर, कल्याण वाले घर में रखा, जहां उससे कपड़े और बर्तन धोने जैसे घर के काम करने के लिए कहा गया। हालांकि, पहली नज़र में मुझे इस आरोप में कोई दम नहीं लगता। इसके अलावा, अगर यह मान भी लिया जाए कि उससे कपड़े और बर्तन धोने के लिए कहा गया था तो ऐसा काम IPC की धारा 498-A के दायरे में नहीं आता। इसे IPC की धारा 498-A के तहत क्रूरता नहीं कहा जा सकता।"

    इसके अलावा, जज ने गौर किया कि महिला ने उस समय, तारीख, जगह या तरीके का ज़िक्र नहीं किया, जिसमें कथित उत्पीड़न हुआ। जज ने देखा कि इन आरोपों के अलावा, महिला ने अपने ससुराल वालों पर आरोप लगाया कि वे उसके पति को उससे झगड़ा करने के लिए उकसाते थे। उनका कहना था कि वह गर्भवती नहीं हो सकती, उसे कुछ स्वास्थ्य समस्याएं हैं और उसे अपने पति को तलाक दे देना चाहिए।

    हालांकि, जज ने यह भी देखा कि FIR में नामजद ससुराल वाले शिकायतकर्ता के साथ पुणे में नहीं रहते थे; उनमें से कुछ सतारा में, कुछ ठाणे जिले में और कुछ UAE में रहते थे।

    बेंच ने कहा,

    "इस तरह, FIR और पूरी चार्ज-शीट से मौजूदा याचिकाकर्ताओं के खिलाफ IPC की धारा 498-A के तहत दंडनीय अपराध किए जाने का पता नहीं चलता है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि शिकायतकर्ता अपने पति के साथ पुणे में रह रही थी, जबकि उसके ससुराल वाले सतारा, अबू धाबी, उल्हासनगर और अंबरनाथ में रह रहे थे/हैं। कभी-कभी वह सतारा में अपने ससुराल वालों के घर जाती थी, और एक बार, आरोप है कि वह बदलापुर में अपनी ननद के घर पर रही थी। इस प्रकार, ऐसा लगता है कि वह उनके साथ नहीं रह रही थी। इसलिए उनके हाथों बुरा बर्ताव किए जाने का सवाल ही नहीं उठता।"

    इन बातों को ध्यान में रखते हुए बेंच ने FIR रद्द की।

    Case Title : R vs State of Maharashtra

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