विमल इलायची के विज्ञापन को लेकर FDA के Show Cause Notice के खिलाफ अजय देवगन बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचे

  • विमल इलायची के विज्ञापन को लेकर FDA के Show Cause Notice के खिलाफ अजय देवगन बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचे

    बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन ने विमल इलायची ब्रांड का प्रचार करने को लेकर महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) द्वारा जारी Show Cause Notice (SCN) को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

    अभिनेता ने अपनी याचिका में दावा किया कि उन्होंने केवल विमल इलायची (Vimal Elaichi) के विज्ञापन में हिस्सा लिया था, न कि विमल पान मसाला के प्रचार में। उन्होंने FDA के नोटिस को मनमाना, अवैध और पहले से तय निष्कर्षों पर आधारित बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की है।

    दरअसल, अगस्त 2026 में महाराष्ट्र FDA ने अजय देवगन और दो अन्य बॉलीवुड अभिनेताओं को नोटिस जारी किया था। FDA का आरोप था कि विमल इलायची के विज्ञापन के जरिए वास्तव में विमल पान मसाला का अप्रत्यक्ष या सरोगेट विज्ञापन किया जा रहा है।

    अजय देवगन ने सितंबर में नोटिस का जवाब देते हुए कहा था कि उन्होंने केवल इलायची के एक अलग उत्पाद का विज्ञापन किया है और विमल पान मसाला का प्रचार नहीं किया।

    FDA का आरोप: इलायची के विज्ञापन के जरिए पान मसाला का प्रचार

    FDA के नोटिस के अनुसार, भले ही विज्ञापन में विमल इलायची को उत्पाद के रूप में दिखाया गया हो, लेकिन उसमें इस्तेमाल किया गया विमल ब्रांड नाम, विज्ञापन की प्रस्तुति, विजुअल एलिमेंट्स, संवाद और बाजार में ब्रांड की पहचान उपभोक्ताओं के मन में विमल पान मसाला से जुड़ाव पैदा कर सकती है।

    FDA का आरोप है कि इस तरह का विज्ञापन प्रतिबंधित पान मसाला उत्पाद की पहचान और उपभोक्ताओं के बीच उसकी लोकप्रियता को बनाए रखने या बढ़ाने का माध्यम बन सकता है। इसी आधार पर इसे सरोगेट या अप्रत्यक्ष विज्ञापन के रूप में जांच के दायरे में रखा गया है।

    नोटिस में अजय देवगन से विज्ञापन में अपनी भागीदारी और प्रचार तत्काल बंद करने, अपने नियंत्रण वाले प्लेटफॉर्म से प्रचार सामग्री हटाने और इसके प्रसार में आगे कोई सहायता नहीं देने को कहा गया था।

    इसके अलावा, FDA ने उनसे विज्ञापन को लेकर की गई Due Diligence, विमल इलायची के स्वतंत्र उत्पाद के रूप में अस्तित्व से जुड़े दस्तावेज, विज्ञापन समझौते की प्रतियां, प्रचार के लिए इस्तेमाल किए गए प्लेटफॉर्म और विज्ञापन प्रसारित होने की अवधि का विवरण भी मांगा था।

    अजय देवगन ने नोटिस को बताया पहले से तय निष्कर्षों पर आधारित

    बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में अजय देवगन ने कहा कि हालांकि FDA के दस्तावेज को Show Cause Notice कहा गया है, लेकिन वास्तव में यह पहले से लिया गया निर्णय प्रतीत होता है।

    याचिका में कहा गया है कि नोटिस जारी करने वाले प्राधिकरण ने पहले ही यह निष्कर्ष निकाल लिया कि अभिनेता ने कानून का उल्लंघन किया है। ऐसे में उनसे स्पष्टीकरण मांगना केवल औपचारिकता बनकर रह गया है।

    अजय देवगन ने यह भी आरोप लगाया कि नोटिस संविधान के अनुच्छेद 14 और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।

    याचिका के अनुसार, FDA की कार्रवाई मनमानी और दुर्भावनापूर्ण है तथा इससे अभिनेता की प्रतिष्ठा और पेशेवर करियर को गंभीर और अपूरणीय नुकसान पहुंच सकता है।

    किन कानूनों के उल्लंघन का लगाया गया आरोप?

    FDA के नोटिस में अजय देवगन पर कई कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। इनमें शामिल हैं:

    • Food Safety and Standards Act (FSSA)
    • Food Safety and Standards (Advertising and Claims) Regulations, 2018
    • Food Safety and Standards (Prohibition and Restrictions on Sales) Regulations, 2011
    • Consumer Protection Act, 2019
    • Guidelines for Prevention of Misleading Advertisements and Endorsements for Misleading Advertisements, 2022
    • Cigarettes and Other Tobacco Products Act (COTPA), 2003
    • Cable Television Networks (Regulation) Act, 1995 और संबंधित नियम।

    नोटिस में एक 'Final Warning' भी शामिल थी। इसके तहत कहा गया था कि निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने या स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए जाने पर अभिनेता को दोबारा कोई नोटिस दिए बिना आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

    4 नवंबर को हो सकती है सुनवाई

    महाराष्ट्र FDA की ओर से स्टैंडिंग काउंसिल प्रियभूषण काकड़े पेश हो रहे हैं।

    अजय देवगन की याचिका पर 4 नवंबर को बॉम्बे हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की डिवीजन बेंच के समक्ष सुनवाई होने की संभावना है।

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    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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