किसी वकील को धमकाना स्वीकार्य नहीं: आंध्र प्रदेश के युवा वकीलों ने बार एसोसिएशन के रुख का किया विरोध

Amir Ahmad

7 May 2026 3:41 PM IST

  • किसी वकील को धमकाना स्वीकार्य नहीं: आंध्र प्रदेश के युवा वकीलों ने बार एसोसिएशन के रुख का किया विरोध

    आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के कई युवा वकीलों ने जज द्वारा जूनियर वकील को न्यायिक हिरासत में भेजने की धमकी देने के मामले में एसोसिएशन के रुख पर आपत्ति जताई है। युवा वकीलों ने कहा कि मामले को आपसी सहमति से सुलझा हुआ बताना बार के जूनियर सदस्यों की भावना को नहीं दर्शाता।

    दो सौ से अधिक युवा वकीलों ने एसोसिएशन के अध्यक्ष को पत्र लिखकर गहरी निराशा जताई। पत्र में कहा गया कि किसी भी वकील को केवल फाइल जोर से रखने पर न्यायिक हिरासत की धमकी देना उचित नहीं है।

    विवाद उस वीडियो क्लिप से जुड़ा है, जिसमें जस्टिस तारलाडा राजशेखर राव जूनियर वकील को कथित तौर पर न्यायिक हिरासत में भेजने की चेतावनी देते दिखाई दे रहे हैं। आरोप है कि वकील ने अदालत में फाइल जोर से रख दी थी।

    इससे पहले एडवोकेट्स एसोसिएशन ने प्रस्ताव पारित कर कहा कि मामला सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझा लिया गया और इसे आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।

    हालांकि युवा वकीलों ने अपने पत्र में कहा,

    “सबसे पहले हम यह कहना चाहते हैं कि किसी भी वकील को केवल फाइल जोर से रखने के लिए न्यायिक हिरासत की धमकी नहीं दी जानी चाहिए, खासकर तब जब वह पेशे में नया हो।”

    पत्र में आगे कहा गया,

    “यदि मान भी लिया जाए कि वकील से गंभीर गलती हुई तब भी यह सवाल उठता है कि असीमित शक्ति के इस्तेमाल की सीमा कहां तय होगी?”

    युवा वकीलों ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर इस मामले में सौहार्दपूर्ण समाधान कैसे माना गया। उन्होंने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि इसे किस आधार पर आपसी सहमति से निपटा हुआ बताया जा रहा है।

    पत्र में यह भी आरोप लगाया गया कि आंध्र प्रदेश बार काउंसिल के एक नवनिर्वाचित सदस्य ने कथित तौर पर कहा था कि युवा वकील को जज के सामने घुटने टेकने चाहिए और जरूरत पड़े तो थप्पड़ भी लगाया जाना चाहिए। हस्ताक्षरकर्ताओं ने इन कथित टिप्पणियों की जांच की मांग करते हुए कहा कि ऐसा सोच रखने वाला व्यक्ति बार काउंसिल के हितों का प्रतिनिधित्व करने योग्य नहीं है।

    युवा वकीलों ने कहा कि यह केवल एक दिन की घटना नहीं बल्कि अदालतों में लंबे समय से चली आ रही उस व्यवस्था का हिस्सा है, जिसमें वकीलों को अपमानित और प्रताड़ित किया जाता है।

    पत्र के अनुसार संबंधित वकील ने अदालत में कई बार माफी मांगी थी और हाथ जोड़कर दया की अपील भी की थी। वकीलों ने कहा कि यदि अदालत को उनका व्यवहार अनुशासनहीन लगा तो उन्हें कोर्ट शिष्टाचार समझाना अवमानना की कार्यवाही शुरू करना या मामला बार काउंसिल को भेजना जैसे वैधानिक विकल्प मौजूद थे।

    युवा वकीलों ने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष पूरी न्यायपालिका के खिलाफ नहीं है बल्कि वे बार और बेंच के बीच अधिक सम्मानजनक संबंध चाहते हैं, खासकर नए वकीलों के लिए।

    उन्होंने एसोसिएशन से अपना पुराना प्रस्ताव वापस लेने, घटना की स्पष्ट निंदा करने, जूनियर वकीलों की समस्याओं पर आम सभा बुलाने और उनकी चिंताओं को मुख्य न्यायाधीश तथा अन्य जजों के समक्ष रखने की मांग की।

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