वक्फ संशोधन अधिनियम को चुनौती: सुप्रीम कोर्ट ने 135 याचिकाकर्ताओं को स्वतंत्र रिट याचिका दाखिल करने की अनुमति दी
सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक आदेश पारित किया है। कोर्ट ने उन याचिकाकर्ताओं को स्वतंत्र रिट याचिकाएं दाखिल करने की अनुमति दी है, जिनकी याचिकाओं को पहले इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन (IA) में बदल दिया गया था।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने यह आदेश In Re: The Waqf (Amendment) Act, 2025 मामले की सुनवाई के दौरान दिया।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि ऐसे आवेदक आज से दो सप्ताह के भीतर अपनी स्वतंत्र रिट याचिकाएं दाखिल कर सकते हैं। साथ ही, सभी पक्षों की दलीलें, हलफनामे और प्रत्युत्तर 31 दिसंबर, 2026 तक पूरे किए जाएं। मामले को जनवरी 2027 के दूसरे सप्ताह में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया।
याचिकाकर्ताओं ने स्वतंत्र रिट याचिका दाखिल करने की अनुमति मांगी
सुनवाई के दौरान डॉ. मोहन गोपाल सहित कुछ आवेदकों के वकीलों ने दलील दी कि पहले से निर्धारित पांच मुख्य याचिकाओं में कानून को चुनौती देने के सभी आधार शामिल नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि न्यायिक आदेश के कारण उन्हें स्वतंत्र याचिकाकर्ता के बजाय हस्तक्षेपकर्ता (Intervenor) के रूप में कार्यवाही में शामिल होना पड़ा। ऐसे में उन्हें स्वतंत्र रिट याचिका दाखिल करने की अनुमति दी जानी चाहिए, ताकि उनके सभी कानूनी आधारों पर विचार किया जा सके।
डॉ. मोहन गोपाल ने कहा कि याचिकाओं की संख्या के आधार पर उन्हें सुनवाई से बाहर नहीं किया जाना चाहिए और पांच मुख्य याचिकाओं में चुनौती के सभी आधार शामिल नहीं हैं।
इस पर जस्टिस सुंदरेश ने कहा कि आवेदकों को अंतिम सुनवाई के दौरान केवल हस्तक्षेपकर्ता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
पीठ ने अपने आदेश में कहा, "हम उन आवेदकों को, जिन्होंने इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन दाखिल की थीं और जिन्हें उसी रूप में आगे बढ़ाने का निर्देश दिया गया था, आज से दो सप्ताह के भीतर रिट याचिकाएं दाखिल करने की अनुमति देते हैं।"
कोर्ट ने नोडल काउंसल को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ताओं द्वारा जिन निर्णयों पर भरोसा किया गया है, उन्हें संकलित करके रिकॉर्ड पर रखे।
इसके अलावा, ASG को लिखित दलीलों पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी पक्षों की दलीलें, हलफनामे और प्रत्युत्तर 31 दिसंबर, 2026 तक पूरे होने चाहिए। मामले को जनवरी 2027 के दूसरे सप्ताह में सूचीबद्ध किया जाएगा।
पहले पांच याचिकाओं को बनाया गया था मुख्य मामला
गौरतलब है कि 17 अप्रैल, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी संख्या में याचिकाएं दाखिल होने के कारण सुनवाई की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए पांच याचिकाओं को मुख्य याचिका के रूप में सुनने का निर्देश दिया था।
इनमें अरशद मदनी, मोहम्मद जमील मर्चेंट, मोहम्मद फजलुर्रहिम, शेख नूरुल हसन और असदुद्दीन ओवैसी की याचिकाएं शामिल थीं।
अन्य सभी रिट याचिकाओं को इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन (IA) में बदल दिया गया था।
मंगलवार की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने 17 अप्रैल, 2025 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि मामलों की संख्या को देखते हुए पांच मुख्य याचिकाओं के माध्यम से सुनवाई करने की व्यवस्था बनाई गई थी और इसे बदलना उचित नहीं होगा।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसका ताजा निर्देश केवल यह सुनिश्चित करने के लिए है कि संबंधित आवेदक अंतिम सुनवाई के दौरान सिर्फ हस्तक्षेपकर्ता बनकर सीमित न रह जाएं।
वक्फ संशोधन अधिनियम को किन आधारों पर चुनौती दी गई?
वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 अप्रैल 2025 में लागू हुआ था। इसके जरिए मूल कानून का नाम बदलकर यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट, एम्पावरमेंट, एफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट एक्ट, 1995 कर दिया गया।
इस कानून को मुख्य रूप से संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19, 21, 25, 26, 29, 30 और 300A के कथित उल्लंघन के आधार पर चुनौती दी गई है।
सितंबर 2025 में तत्कालीन चीफ जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूरे कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। हालांकि, कोर्ट ने प्रथम दृष्टया कुछ प्रावधानों पर अंतरिम रोक लगाई थी।
इनमें वक्फ बनाने के लिए कम से कम पांच वर्षों तक इस्लाम का पालन करने की शर्त (नियम बनाए जाने तक), धारा 3C के तहत नामित अधिकारी को दी गई कुछ शक्तियां और केंद्रीय वक्फ परिषद तथा राज्य वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या से संबंधित प्रावधान शामिल थे।
मामले में अब जनवरी 2027 के दूसरे सप्ताह में सुनवाई होने की संभावना है।