तिरुपति लड्डू घी मिलावट मामला: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल आंध्र प्रदेश से बाहर ट्रांसफर करने की याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तिरुपति मंदिर के लड्डुओं में कथित घी मिलावट मामले का ट्रायल आंध्र प्रदेश से बाहर स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने महाराष्ट्र के डेयरी कारोबारी माचिंद्र शांताराम लंके की याचिका पर सुनवाई करते हुए इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। लंके इस मामले में आरोपी हैं और Malganga Milk and Agro Products Pvt. Ltd. के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि मामले को लेकर आंध्र प्रदेश के राजनीतिक नेता लगातार बयान दे रहे हैं, जिससे निष्पक्ष सुनवाई के लिए प्रतिकूल माहौल बन गया है।
उन्होंने कहा कि यह मामला राजनीतिक मुद्दा बन चुका है और राज्य में माहौल बेहद संवेदनशील है। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री भी इस मामले पर बयान दे चुके हैं। दवे ने दावा किया कि फॉरेंसिक रिपोर्ट में घी में पशु वसा की मौजूदगी से इनकार किए जाने के बावजूद राजनीतिक नेता लगातार इस तरह के बयान दे रहे हैं।
दवे ने कहा कि भले ही ट्रायल जज राजनीतिक बयानों से प्रभावित न हों, लेकिन ऐसे माहौल में निष्पक्ष अभियोजन की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने अनुरोध किया कि मुकदमे को किसी पड़ोसी राज्य में स्थानांतरित कर दिया जाए, जहां यह मामला इतना भावनात्मक और राजनीतिक मुद्दा न हो।
उन्होंने आगे कहा कि याचिकाकर्ता को राजनीतिक दलों के बीच चल रही लड़ाई में इस्तेमाल किया जा रहा है और इसका नुकसान केवल उन्हें ट्रायल के दौरान उठाना पड़ेगा। उन्होंने यह भी दलील दी कि चूंकि मामले की जांच CBI कर रही है और अधिकांश आरोपी उत्तर भारत से हैं, इसलिए भाषा की बाधा भी एक महत्वपूर्ण पहलू है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस मांग पर सहमति जताने से इनकार कर दिया।
पीठ ने कहा कि इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने की है। इसके अलावा, अधिकांश गवाह और साक्ष्य आंध्र प्रदेश से ही संबंधित हैं।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने ट्रायल को आंध्र प्रदेश से बाहर स्थानांतरित करने की याचिका खारिज कर दी।