सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून द्वारा तय की गई सावधानी बरतने में चूक होना ही अपने आप में कोई आपराधिक कृत्य नहीं है। कोर्ट ने एक स्कूल के अध्यक्ष और अधीक्षक के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की। इन पर 12 साल की एक छात्रा की मौत के मामले में मुकदमा चलाया जा रहा था; स्कूल परिसर में निर्माण कार्य के दौरान एक खंभा गिरने से छात्रा उसके नीचे दब गई।

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने कहा,

"कानून द्वारा तय सावधानी के स्तर को न अपनाना, यानी अपनी ड्यूटी का पालन न करना, कोई आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता। जिस ठेकेदार को काम सौंपा गया, वह लापरवाही का दोषी हो सकता है, क्योंकि उसे पता था कि खराब निर्माण कार्य से कोई दुर्घटना हो सकती है या किसी की जान जा सकती है। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि स्कूल के अध्यक्ष और अधीक्षक को भी यह पता था कि खराब निर्माण कार्य के कारण स्कूल में पढ़ने वाले किसी छात्र की मौत हो सकती है।"

कोर्ट ने उस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में जान गंवाने वाली छात्रा के माता-पिता के दुख और पीड़ा को समझा, लेकिन स्कूल अध्यक्ष के खिलाफ चल रही कार्यवाही को आगे बढ़ाने से इनकार किया। कोर्ट ने पाया कि जो घटना हुई, उसे सीधे तौर पर स्कूल अध्यक्ष की लापरवाही का नतीजा नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने कहा,

"इस आदेश को लिखवाना बहुत ही दर्दनाक अनुभव था। यह सोचकर ही दिल दहल जाता है कि 12 साल की एक बच्ची अपने ही स्कूल में एक खंभे के नीचे दब गई। हम उस बच्ची के माता-पिता के दुख और पीड़ा की कल्पना कर सकते हैं, जो वे आज भी झेल रहे होंगे। लेकिन, एक जज को इन भावनाओं में बहकर अपना फैसला नहीं बदलना चाहिए, वरना न्याय नहीं हो पाएगा। कानून चाहे कितना भी कठोर क्यों न लगे, लेकिन कानून तो कानून है, और इसका सम्मान किया जाना चाहिए।"

अदालत के अनुसार, छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी ठेकेदार की है। अगर ठेकेदार ने थोड़ी भी सावधानी बरती होती तो इस दुखद घटना को टाला जा सकता था।

अदालत ने कहा कि अपीलकर्ता पर IPC की धारा 304-A के तहत 'आपराधिक लापरवाही' (Criminal Negligence) से हुई मौत के लिए आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

अदालत ने स्पष्ट किया,

"IPC की धारा 304-A के तहत आपराधिक जिम्मेदारी तय करने के लिए यह जरूरी है कि मौत, आरोपी के किसी लापरवाह या गैर-जिम्मेदाराना काम का सीधा नतीजा हो। साथ ही यह काम ही मौत का मुख्य और प्रत्यक्ष कारण होना चाहिए, जिसमें किसी और की लापरवाही का कोई दखल न हो।" [देखें: कुर्बान हुसैन मोहम्मदअली रंगावाला बनाम महाराष्ट्र राज्य (1965)]

अदालत ने कहा,

"...हमारी राय में अपीलकर्ताओं की स्थिति अन्य आरोपियों (यदि कोई हों) से अलग है। हमें नहीं लगता कि अपीलकर्ताओं पर IPC की धारा 304-A या धारा 304 के तहत लापरवाही या गैर-जिम्मेदाराना हरकत के लिए मुकदमा चलना चाहिए। छात्र की दुखद मौत के लिए प्रथम दृष्टया (Prima-Facie) ठेकेदार को जिम्मेदार माना जा सकता है। बेशक, यह राय केवल शुरुआती तौर पर है और यह इस बात पर निर्भर करेगी कि मुकदमे के दौरान क्या सबूत सामने आते हैं - खासकर तब, जब ठेकेदार भी आरोपियों में से एक हो।"

जस्टिस परदीवाला द्वारा लिखे गए फैसले में बताया गया कि किसी काम को 'आपराधिक लापरवाही' तब माना जाता है, जब "कोई व्यक्ति उन सावधानियों को बरतने में विफल रहता है, जिन्हें उस परिस्थिति में अपनाना उसका अनिवार्य कर्तव्य था।"

इसके अलावा, IPC की धारा 304-A (लापरवाही से मौत) के तहत आपराधिक दायित्व तय करने के लिए, यह साबित होना चाहिए कि कोई लापरवाही या जल्दबाजी भरा काम किया गया था, जिससे आपराधिक दायित्व बनता हो। कोर्ट के अनुसार, मुख्य बात यह पता लगाना है कि क्या आरोपी का काम वास्तव में किसी लापरवाही या जल्दबाजी का सीधा परिणाम था, और क्या यही काम किसी और की लापरवाही के दखल के बिना, मौत का मुख्य और प्रभावी कारण बना।

कोर्ट ने कहा,

"दूसरे शब्दों में कहें तो, क्या केवल यह तथ्य कि स्कूल के प्रशासक (अपीलकर्ता) छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहे—जैसे कि खंभे का सही निर्माण न करवाना—IPC की धारा 304A के तहत अपराध साबित करने के लिए काफी है? इस सवाल का जवाब यह तय करेगा कि क्या अपीलकर्ताओं का काम (जैसा कि अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया है) मौत का 'मुख्य कारण' (Causa Causans) है, या फिर बीच में कोई ऐसी घटना (Causa Interveniens) घटी जिसने घटनाओं की कड़ी को तोड़ दिया, जिससे उनका काम—भले ही वह लापरवाही भरा हो—मौत का 'तत्काल कारण' नहीं रह गया। या फिर, क्या यह घोर लापरवाही या बेहद गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार की श्रेणी में आता है?"

कानून को लागू करते हुए कोर्ट ने टिप्पणी की:

"...इस मामले में हुई घटना को लापरवाही का सीधा और मुख्य कारण नहीं माना जा सकता, भले ही हम यह मान लें कि अपीलकर्ताओं ने छात्रों की सुरक्षा के लिए उचित सावधानी नहीं बरती। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। निर्माण कार्य असल में ठेकेदार और उसकी टीम कर रही थी। अगर ठेकेदार ने छात्रों की सुरक्षा के लिए थोड़ी भी सावधानी बरती होती तो शायद यह घटना न होती। इसलिए अपीलकर्ताओं की ओर से बताई गई लापरवाही को 'मुख्य कारण' (Causa Causans) नहीं माना जा सकता। हालांकि, यह एक 'अनिवार्य शर्त' (causa sine qua non) हो सकती है।"

संक्षेप में, कोर्ट ने माना कि अपीलकर्ताओं के काम को 'मुख्य कारण' (Causa Causans—यानी लापरवाही का सीधा या मुख्य कारण) नहीं कहा जा सकता। इसके बजाय, बीच में कोई अन्य कारण (Causa Interveniens) आ गया, जिसने घटनाओं की कड़ी को तोड़ दिया। इस वजह से अपीलकर्ताओं का काम—भले ही वह लापरवाही भरा था—मौत का 'तत्काल कारण' नहीं बना। परिणामस्वरूप, अपील स्वीकार की गई, जिससे अपीलकर्ता-अभियुक्त के विरुद्ध लंबित आपराधिक कार्यवाही रद्द हो गई।

Case Title : MATIN SHANKARRAO BHOSALE & ANR VERSUS STATE OF MAHARASHTRA & ANR

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