अंतरिम आदेश से किसी पक्ष को असंगत नुकसान नहीं होना चाहिए: राजस्थान हाईकोर्ट ने विवाद लंबित रहने तक शराब दुकान को संचालन की अनुमति दी

Update: 2026-06-24 07:19 GMT

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि अंतरिम आदेशों का उद्देश्य विवाद के अंतिम निपटारे तक दोनों पक्षों के हितों में संतुलन बनाए रखना होता है। ऐसे आदेश किसी एक पक्ष पर अनावश्यक या असंगत बोझ नहीं डालने चाहिए।

जस्टिस फरजंद अली और जस्टिस सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए एक शराब दुकान संचालक को आबकारी विभाग द्वारा स्वीकृत नए स्थान से दुकान चलाने की अनुमति दी।

अदालत ने कहा कि दुकान का स्थानांतरण उसी आबकारी क्लस्टर के भीतर किया गया और अंतरिम रोक के कारण लाइसेंसधारी को लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था।

मामले के अनुसार अपीलकर्ता के पास वैध आबकारी लाइसेंस था। जिला आबकारी अधिकारी ने उसे अपनी शराब दुकान एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने की अनुमति दी।

इस आदेश को चुनौती देते हुए रिट याचिका दायर की गई, जिस पर एकल पीठ ने अंतरिम रोक लगा दी। इसके चलते अपीलकर्ता नए स्थान पर दुकान संचालित नहीं कर पा रहा था। इसी अंतरिम आदेश को अपील में चुनौती दी गई।

अपीलकर्ता की ओर से दलील दी गई कि नया स्थान उसी क्लस्टर के भीतर है, जैसा आबकारी नीति में निर्धारित है। इससे न तो लाइसेंस की सीमा बदली है और न ही क्षेत्रीय आवंटन में कोई परिवर्तन हुआ है। केवल दुकान का भौतिक स्थान बदला गया।

यह भी कहा गया कि अंतरिम रोक के कारण उसे प्रतिदिन भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है और उसके व्यापारिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि न्याय के हित में यह उचित होगा कि एकल पीठ के समक्ष लंबित स्थगन आवेदन पर अंतिम निर्णय होने तक अपीलकर्ता को नए स्थान से दुकान संचालित करने की अनुमति दी जाए।

अदालत ने कहा,

"अंतरिम आदेशों का उद्देश्य पक्षकारों के बीच संतुलन बनाए रखना है और विशेष परिस्थितियों को छोड़कर ऐसे आदेश किसी एक पक्ष पर असंगत कठिनाई नहीं थोपने चाहिए। साथ ही, अपीलीय अदालत द्वारा किया गया कोई भी अंतरिम प्रबंध ऐसा नहीं होना चाहिए, जिससे एकल पीठ के समक्ष लंबित कार्यवाही निष्प्रभावी हो जाए या विवाद के गुण-दोष पर पूर्व निर्णय जैसा प्रभाव पड़े।"

खंडपीठ ने माना कि यह व्यवस्था एक ओर अपीलकर्ता को लगातार हो रहे आर्थिक नुकसान से बचाएगी, वहीं दूसरी ओर एकल पीठ को मामले के गुण-दोष पर स्वतंत्र रूप से फैसला करने का पूरा अधिकार भी सुरक्षित रहेगा।

इन्हीं टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने अपील का निस्तारण करते हुए विवाद के अंतिम निर्णय तक शराब दुकान को स्थानांतरित स्थल से संचालन की अनुमति दी।

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