राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि किसी शिकायत मामले में आरोपी को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ शिकायतकर्ता अपील करने की अनुमति (लीव टू अपील) मांग सकता है। यह इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आरोपी को ट्रायल कोर्ट ने बरी किया है या अपीलीय अदालत ने यह कानून के लागू प्रावधानों के अधीन होगा।

जस्टिस फरजंद अली ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट 1881 (NI Act) की धारा 138 के तहत चेक बाउंस मामले में अपील करने की अनुमति दी।

कोर्ट ने गौर किया कि रजिस्ट्री ने गलती से बिना जरूरी अनुमति के ही इस अपील को दर्ज को किया था।

कोर्ट ने कहा कि चूंकि अब अपील करने की अनुमति मिल गई, इसलिए कानून के अनुसार अपील की कार्यवाही आगे बढ़ सकती है। कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि केवल प्रक्रियात्मक तकनीकी बारीकियों की वजह से न्याय मिलने में रुकावट नहीं आनी चाहिए।

कोर्ट आरोपी को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ अपील करने की अनुमति मांगने वाली अर्जी पर सुनवाई कर रहा था। शुरुआत में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराया लेकिन अपीलीय अदालत ने उस दोषसिद्धि को रद्द कर दिया और आरोपी को बरी कर दिया।


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