बिना वारंट रात में NDPS की तलाशी वैध, आपात स्थिति में धारा 42 की कार्रवाई बाद में हो सकती है: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने मादक पदार्थ मामले में जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि यदि पुलिस को गश्त के दौरान ऐसी सूचना मिलती है, जिस पर तत्काल कार्रवाई जरूरी हो तो रात में बिना वारंट तलाशी लेने की स्थिति में NDPS Act की धारा 42 के तहत आवश्यक कार्रवाई को उचित समय तक टाला जा सकता है। हालांकि प्रावधानों का पूरी तरह पालन न करना स्वीकार्य नहीं है।
जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू ने कहा कि आपात स्थिति में धारा 42 के तहत अनुपालन को उचित अवधि के लिए स्थगित किया जा सकता है लेकिन प्राप्त सूचना और बिना वारंट तलाशी लेने के कारणों को दर्ज करना तथा उन्हें निर्धारित समय में वरिष्ठ अधिकारी तक पहुंचाना जरूरी है।
मामले में पुलिस अधिकारी ने सूर्यास्त के बाद बिना वारंट तलाशी ली थी। तलाशी के बाद मादक पदार्थ बरामद हुआ और आरोपियों को मौके से गिरफ्तार किया गया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि तलाशी सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच हुई, इसलिए NDPS Act की धारा 42 के तहत निर्धारित सुरक्षा उपायों का पालन अनिवार्य था। उनका कहना था कि पुलिस को रात करीब 8:30 बजे सूचना मिल गई थी और इसके बावजूद वारंट लेने का प्रयास नहीं किया गया।
यह भी तर्क दिया गया कि सूचना मिलने और वारंट नहीं लेने के कारणों की जानकारी 72 घंटे के भीतर वरिष्ठ अधिकारी को भेजे जाने का कोई दस्तावेज रिकॉर्ड पर नहीं था। बचाव पक्ष ने संबंधित दस्तावेज को बाद में तैयार किया गया दस्तावेज बताया।
हाईकोर्ट ने इस दलील पर सुप्रीम कोर्ट के करनैल सिंह बनाम हरियाणा राज्य के फैसले का हवाला दिया। इसमें कहा गया कि यदि अधिकारी को गश्त के दौरान या रास्ते में ऐसी सूचना मिलती है, जिस पर तत्काल कार्रवाई जरूरी है तो आपात स्थिति में धारा 42 के अनुपालन को उचित अवधि तक टाला जा सकता है। हालांकि, धारा 42(1) और 42(2) का पूरी तरह पालन न करना स्वीकार्य नहीं है।
हाईकोर्ट ने पाया कि वर्तमान मामले में पुलिस अधिकारी को गश्त के दौरान गुप्त सूचना मिली थी और सूचना तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता वाली थी। अधिकारी ने सूचना को लिखित रूप में दर्ज किया था। साथ ही वारंट हासिल किए बिना कार्रवाई करने के कारण भी लिखित रूप में दर्ज किए गए।
अदालत ने पाया कि यह लिखित सूचना और वारंट नहीं लेने के कारणों वाला दस्तावेज कार्रवाई के लिए संबंधित स्थान पर जाने से पहले ही तत्काल वरिष्ठ अधिकारी को भेज दिया गया।
पीठ ने कहा कि दर्ज किए गए कारणों से स्पष्ट था कि वारंट लेने में देरी होने पर आरोपियों को मादक पदार्थ छिपाने या वहां से हटाने का अवसर मिल सकता था।
इसके बाद पुलिस ने मौके पर आरोपियों को मादक पदार्थ के साथ पकड़ा। बरामद मादक पदार्थ की मात्रा वाणिज्यिक मात्रा से अधिक थी और दोनों आरोपियों को मौके पर गिरफ्तार कर लिया गया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि सूचना और बिना वारंट कार्रवाई करने के कारणों को तलाशी से पहले ही वरिष्ठ अधिकारी को भेज दिया गया। इसलिए केवल यह तथ्य कि तलाशी रात के समय की गई, अपने आप में तलाशी को धारा 42 के विपरीत नहीं बनाता।
बचाव पक्ष की इस दलील को भी अदालत ने खारिज किया कि सूचना मिलने और तलाशी के बीच इतना समय था कि वारंट हासिल किया जा सकता था। हाईकोर्ट ने कहा कि केवल यह दावा अपने आप में पुलिस कार्रवाई को धारा 42 का उल्लंघन नहीं बना देता और रिकॉर्ड से यह भी स्पष्ट नहीं होता कि ऐसा पर्याप्त समय वास्तव में उपलब्ध था।
अदालत ने माना कि पुलिस अधिकारी द्वारा दर्ज किए गए कारण संतोषजनक थे और धारा 42 के प्रावधानों का आवश्यक अनुपालन किया गया। आरोपियों के पक्ष में जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।
हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज की।