राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि समय-सीमा के बाद दायर अपील में देरी माफ किए बिना अंतरिम रोक का आदेश केवल अत्यंत असाधारण परिस्थितियों में ही दिया जा सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक अपील दायर करने में हुई देरी को कानून के अनुसार माफ नहीं किया जाता, तब तक अपीलीय प्राधिकारी ऐसी अपील पर सुनवाई करने का अधिकार नहीं रखता।

जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने राजस्व अपीलीय प्राधिकरण द्वारा समय-सीमा से बाहर दायर अपील में पारित अंतरिम रोक का आदेश रद्द किया। कोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में ऐसे कोई विशेष या असाधारण हालात नहीं थे, जिनके आधार पर देरी माफ किए बिना अंतरिम रोक दी जा सके।

मामले में याचिकाकर्ता ने प्रतिवादी के खिलाफ घोषणा और स्थायी निषेधाज्ञा के लिए मुकदमा दायर किया। यह मुकदमा अनुपस्थिति के कारण खारिज हो गया। इसके बाद मुकदमा बहाल करने के लिए आवेदन दायर किया गया, जिसे 2022 में मंजूर कर लिया गया।

इस आदेश के खिलाफ प्रतिवादी ने राजस्व अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष अपील दायर की, लेकिन यह अपील तीन साल से अधिक की देरी के बाद दायर की गई।

राजस्व अपीलीय प्राधिकरण ने अपील पर नोटिस जारी करते समय ही 2022 के बहाली आदेश के संचालन पर अंतरिम रोक लगाई। हालांकि, उसने पहले यह तय नहीं किया कि अपील दायर करने में हुई देरी को माफ किया जाए या नहीं। इस आदेश को याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि समय-सीमा से बाहर दायर अपील में देरी माफ किए बिना राजस्व अपीलीय प्राधिकरण अंतरिम रोक का आदेश नहीं दे सकता।

हाईकोर्ट ने कहा कि किसी अपील की सीमा अवधि का सवाल केवल तकनीकी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह अपीलीय प्राधिकारी के अधिकार क्षेत्र की बुनियाद से जुड़ा है। कोर्ट ने कहा कि जब तक देरी माफ नहीं की जाती, तब तक कानून की नजर में अपील का वैध रूप से अस्तित्व ही नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने कहा,

“जब तक अपील दायर करने में हुई देरी माफ नहीं की जाती, तब तक कानून की नजर में अपील अस्तित्व में नहीं मानी जा सकती। वैध रूप से दायर अपील के अभाव में अदालत समय-बाधित अपील के गुण-दोष पर सुनवाई करने का अधिकार नहीं रखती।”

हाईकोर्ट ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया कि देरी माफ करने की मांग करने वाले पक्ष द्वारा दिए गए कारणों की सत्यता और सद्भावना की पहले जांच की जानी चाहिए। जब तक देरी माफ न हो, तब तक मामले के गुण-दोष पर आगे नहीं बढ़ा जा सकता।

कोर्ट ने कहा कि सामान्य स्थिति में देरी माफ किए बिना अपीलीय प्राधिकारी के पास ऐसी अपील को स्वीकार करने या उस पर कोई आदेश पारित करने का अधिकार नहीं होता। हालांकि, अत्यंत असाधारण परिस्थितियों में, जहां अपील में दिए गए आदेश के गंभीर और तत्काल परिणाम सामने आ रहे हों, अंतरिम रोक पर विचार किया जा सकता है।

मौजूदा मामले में हाईकोर्ट ने पाया कि राजस्व अपीलीय प्राधिकरण के सामने ऐसी कोई विशेष या असाधारण परिस्थिति नहीं थी, जो देरी माफ किए बिना अंतरिम रोक लगाने को उचित ठहरा सके।

इस आधार पर हाईकोर्ट ने राजस्व अपीलीय प्राधिकरण का अंतरिम रोक संबंधी आदेश कानून की नजर में टिकाऊ नहीं माना और उसे रद्द किया।

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