क्या पैरोल से सजा अस्थायी रूप से निलंबित हो जाती है? राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम कानूनी सवाल बड़ी बेंच को भेजे
राजस्थान हाईकोर्ट ने पैरोल से जुड़े तीन अहम कानूनी सवालों को आधिकारिक निर्णय के लिए बड़ी बेंच के पास भेज दिया। इनमें यह सवाल शामिल है कि पैरोल की मंजूरी से क्या सजा अस्थायी रूप से निलंबित हो जाती है और पैरोल आवेदन पर कौन-से नियम लागू होंगे।
चीफ जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने पहला सवाल यह तय करने के लिए भेजा कि पैरोल आवेदन पर राजस्थान कैदी पैरोल पर रिहाई नियम, 1958 के तहत विचार किया जाना चाहिए, जो दोषसिद्धि के समय लागू थे, या 2021 के नियमों के तहत, जो आवेदन पर विचार किए जाने के समय प्रभावी हैं।
खंडपीठ ने दूसरा सवाल यह तय करने के लिए भेजा कि क्या पैरोल दिए जाने का अर्थ दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 401 के तहत सजा का अस्थायी निलंबन है। इस प्रावधान का समकक्ष भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 432 है।
तीसरा सवाल CrPC के निरस्त होने और उसकी जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) के लागू होने के बाद 1958 के नियमों की प्रयोज्यता और संचालन से जुड़ा है।
हाईकोर्ट कैदियों की उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिनमें स्थायी पैरोल के आवेदन खारिज किए जाने को चुनौती दी गई। प्रमुख याचिका में याचिकाकर्ता करौली स्थित खुली जेल में बंद है। उसे 1958 के नियमों के नियम 14(डी) का हवाला देते हुए स्थायी पैरोल देने से इनकार कर दिया गया।
कोर्ट ने गौर किया कि नियम 14(डी) लागू होने के बावजूद राज्य ने कुछ कैदियों को स्थायी पैरोल दी थी। कोर्ट ने वकीलों से यह भी पूछा था कि 2021 के नियम लागू होने से पहले दोषी ठहराए गए कैदियों के पैरोल आवेदन पर नियमों के किस सेट के तहत विचार किया जाना चाहिए।
इन कानूनी सवालों पर स्पष्टता की आवश्यकता को देखते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित मामलों को बड़ी बेंच के पास भेज दिया।