मृतक की आय में HRA व अन्य भत्ते भी शामिल होंगे, मुआवजा गणना में कटौती गलत: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना मामलों में मुआवजा तय करने को लेकर अहम स्पष्टता देते हुए कहा कि मृतक की आय में मिलने वाले विभिन्न भत्तों को हटाकर गणना नहीं की जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उच्च दायित्व भत्ता, शहर प्रतिकर भत्ता, मकान किराया भत्ता (HRA), धुलाई भत्ता सहित अन्य भत्ते मृतक की आय का हिस्सा हैं और इन्हें घटाना कानूनन सही नहीं है।
जस्टिस संदीप तनेजा की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि जिला कोर्ट द्वारा इन भत्तों को हटाकर मुआवजा तय करना उचित नहीं है।
कोर्ट ने कहा,
“सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित कानून के अनुसार मृतक को दिए जा रहे विभिन्न भत्तों को उसकी मासिक आय से अलग नहीं किया जा सकता। ये सभी भत्ते उसकी आय का हिस्सा हैं और आश्रितों को मिलने वाले मुआवजे की गणना में शामिल किए जाने चाहिए।”
हाईकोर्ट ने इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का भी हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि आय में वे सभी लाभ शामिल होते हैं, जो व्यक्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मिलते हैं और जिन पर आयकर या पेशेवर कर लागू होता है, भले ही कुछ हिस्सों को कानून के तहत छूट मिली हो। इसलिए भत्तों को आय से अलग नहीं किया जा सकता।
साथ ही एक अन्य फैसले का उल्लेख करते हुए कोर्ट ने कहा कि नियोक्ता द्वारा दिए जाने वाले अतिरिक्त लाभ या सुविधाएं भी मासिक आय में जोड़ी जानी चाहिए, क्योंकि उनका सीधा योगदान परिवार के भरण-पोषण में होता है।
इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने जिला कोर्ट द्वारा तय मुआवजे को बढ़ा दिया और याचिका का निपटारा किया।
इस फैसले से स्पष्ट हो गया कि मोटर दुर्घटना मामलों में मुआवजा तय करते समय मृतक की वास्तविक आय का समग्र आकलन किया जाना जरूरी है, ताकि आश्रितों को उचित और न्यायसंगत राहत मिल सके।