FIR दर्ज किए बिना भी मजिस्ट्रेट ले सकते हैं पुलिस की मदद: राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया अधिकार क्षेत्र
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मजिस्ट्रेट किसी शिकायत पर सीधे FIR दर्ज कराने का आदेश दिए बिना भी पुलिस या अन्य सक्षम अधिकारी से जांच करा सकते हैं। अदालत ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 225 के तहत यह जांच केवल मजिस्ट्रेट की सहायता के लिए होती है, न कि पूर्ण पुलिस जांच का विकल्प।
जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने कहा कि धारा 225 के अंतर्गत की जाने वाली जांच सीमित और प्रारंभिक प्रकृति की होती है, जिसका उद्देश्य यह तय करना होता है कि आरोपी के खिलाफ आगे कार्यवाही के लिए पर्याप्त आधार है या नहीं। यह जांच केवल तथ्यों की जानकारी देने तक सीमित रहती है। इसमें गिरफ्तारी या चार्जशीट जैसी कठोर कार्रवाई का अधिकार नहीं होता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि धारा 225 के तहत “जांच” का अर्थ पूर्ण पुलिस जांच नहीं है बल्कि यह मजिस्ट्रेट की प्रक्रिया का एक हिस्सा है। इसके विपरीत धारा 175 के तहत होने वाली पुलिस जांच व्यापक होती है, जिसमें गिरफ्तारी और आरोप पत्र दाखिल करने जैसी शक्तियां शामिल होती हैं।
हाईकोर्ट ने कहा,
“धारा 225 के तहत जांच का दायरा सीमित है और यह केवल न्यायिक संतुष्टि के लिए सहायक साधन के रूप में काम करती है। इसे पूर्ण पुलिस जांच के बराबर नहीं माना जा सकता।”
मामले में याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि उसकी शिकायत पर मजिस्ट्रेट को FIR दर्ज कराने का आदेश देना चाहिए।न ऐसा नहीं किया गया। इसके बजाय सीमित जांच के लिए मामला पुलिस को भेज दिया गया।
अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि यह मजिस्ट्रेट के विवेकाधिकार पर निर्भर करता है कि वह शिकायत पर किस प्रक्रिया को अपनाए। हर मामले में FIR दर्ज कराना आवश्यक नहीं है।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि धारा 223 के तहत मजिस्ट्रेट द्वारा शिकायतकर्ता और गवाहों की प्रारंभिक जांच महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय है जिससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर अनावश्यक कार्यवाही न हो।
अदालत ने माना कि इस मामले में मजिस्ट्रेट ने पहले शिकायतकर्ता का परीक्षण किया और पर्याप्त सामग्री न मिलने पर धारा 225 के तहत सीमित जांच का आदेश दिया जो कानून के अनुरूप और उचित था।
इस आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट का फैसला न्यायिक विवेक और उचित विचार का परिणाम है।