राजस्थान हाईकोर्ट ने आरोपी को कथित तौर पर महिला के कपड़े पहनाकर भीड़भाड़ वाले बाजार में घुमाने और उसका सिर मुंडवाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि ऐसी घटना मानव गरिमा और संवैधानिक नैतिकता के मूल सिद्धांतों पर सीधा प्रहार करती है।

जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता के आरोप सही हैं तो उसके पास हर्जाना, मुआवजा या व्यक्तिगत क्षति से संबंधित कानूनी कार्यवाही शुरू करने का विकल्प खुला है।

मामला एक धोखाधड़ी के आरोपी द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था। याचिकाकर्ता का आरोप था कि पुलिस अधिकारियों ने उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित किया और उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाई।

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि कुछ लोग सादे कपड़ों में उसके घर पहुंचे और उसे अपने साथ ले गए। इसके बाद एक पुलिस थाने में उसके साथ मारपीट की गई और फिर उसे दूसरे थाने की पुलिस के हवाले कर दिया गया।

याचिका के अनुसार अदालत में पेश करने से पहले पुलिसकर्मियों ने उसका सिर मुंडवा दिया उसे महिला के कपड़े पहनाए और भीड़भाड़ वाले बाजार में घुमाया। इतना ही नहीं, इस घटना के फोटो और वीडियो भी व्यापक रूप से प्रसारित किए गए।

वहीं पुलिस अधीक्षक की ओर से इन आरोपों का विरोध करते हुए कहा गया कि गिरफ्तारी के समय आरोपी पहले से ही महिला के कपड़ों में था और अपनी पहचान छिपाने के लिए उसने स्वयं सिर मुंडवा रखा था।

हालांकि, हाईकोर्ट ने इस स्पष्टीकरण को स्वीकार करने से इनकार किया।

अदालत ने कहा,

"यह तर्क न तो सामान्य बुद्धि के अनुरूप है और न ही सामान्य मानवीय व्यवहार के। यदि कोई व्यक्ति अपनी पहचान छिपाना चाहता है तो वह स्वयं सिर मुंडवाकर महिला के कपड़े पहनने के बाद भीड़भाड़ वाले बाजार में घूमना या घुमाया जाना क्यों स्वीकार करेगा, जहां उसे सार्वजनिक उपहास और अपमान का सामना करना पड़े?"

अदालत ने आगे कहा कि यदि वास्तव में पहचान छिपाने का उद्देश्य होता तो स्वाभाविक व्यवहार सार्वजनिक स्थानों से दूर रहने का होता न कि लोगों के बीच आने का।

हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि पुलिस का यह स्पष्टीकरण मानव गरिमा और संवैधानिक मूल्यों के उल्लंघन वाली घटना पर पर्दा डालने का प्रयास प्रतीत होता है।

हालांकि, अदालत ने पुलिस अधीक्षक द्वारा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न होने देने और हिरासत में रखे गए व्यक्तियों की गरिमा बनाए रखने के आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया।

इसी आधार पर अदालत ने संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कोई कार्यवाही शुरू नहीं की, लेकिन याचिकाकर्ता को हर्जाना, मुआवजा या अन्य उपयुक्त कानूनी उपाय अपनाने की स्वतंत्रता प्रदान की।

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