'रक्षक ही भक्षक बन जाए तो व्यवस्था ढह जाएगी: राजस्थान हाईकोर्ट ने गैंगस्टर-पुलिस गठजोड़ पर जताई चिंता, DGP को दिए निर्देश
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक गंभीर मामले में पुलिस पर गैंगस्टर को संरक्षण देने के आरोपों को चिंताजनक संस्थागत विफलता करार दिया। अदालत ने कहा कि जब कानून की रक्षा करने वाले ही उसे तोड़ने लगें तो जनता का भरोसा पूरी तरह खत्म हो सकता है।
जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की जिसमें याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि एक पुलिस अधिकारी के इशारे पर गैंगस्टर उन्हें और उनके परिवार को धमका रहा है।
अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा,
“जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो व्यवस्था के पूरी तरह ढहने का खतरा पैदा हो जाता है। ऐसे में राज्य मूकदर्शक नहीं रह सकता, जब किसी की जान को खतरा बताया जाए।”
मामले में याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि 2016 में उनके परिवार के सदस्यों को गलत तरीके से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन्होंने संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया लेकिन तब से उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं और अदालत में गवाही देने से रोका जा रहा है।
याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि एक गैंगस्टर द्वारा उन्हें बार-बार धमकाया जा रहा है कि वे मामला वापस ले लें। उन्होंने पुलिस के उच्च अधिकारियों से सुरक्षा की मांग की लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
अदालत ने पाया कि खुद पुलिस ने भी स्वीकार किया है कि याचिकाकर्ता को आपराधिक तत्वों से खतरा है।
इस पर अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में पुलिस की जिम्मेदारी वैकल्पिक नहीं बल्कि अनिवार्य हो जाती है।
पीठ ने निर्देश दिया कि संबंधित पुलिस अधीक्षक तुरंत प्रभावी कदम उठाकर याचिकाकर्ता और उनके परिवार को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करें।
साथ ही अदालत ने पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया कि वह इस मामले को गंभीरता से लें और किसी सीनियर अधिकारी से निष्पक्ष जांच कराएं।
अदालत ने यह भी आदेश दिया कि संबंधित पुलिस अधिकारी याचिकाकर्ता और उनके परिवार से पूरी तरह दूरी बनाए रखें ताकि जांच पर किसी प्रकार का प्रभाव न पड़े।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो इसके लिए संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे।
इसी के साथ अदालत ने याचिका का निपटारा किया लेकिन राज्य को कड़ा संदेश दिया कि कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।