राम रहीम के खिलाफ 'साजिश' का आरोप लगाने वाले विज्ञापनों को लेकर 'द हिंदू' और 'दैनिक भास्कर' के खिलाफ आपराधिक अवमानना मामला शुरू
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 'द हिंदू' और 'दैनिक भास्कर' में छपे "डेरा सच्चा सौदा क्या है? (तथ्य बनाम कल्पना)" शीर्षक वाले पहले पन्ने के विज्ञापन पर आपराधिक अवमानना का स्वतः संज्ञान लिया।
इसने डेरा सच्चा सौदा और दोनों अखबारों के प्रकाशकों और प्रधान संपादकों को नोटिस जारी किया।
यह मामला जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज और जस्टिस रविंदर मलिक के सामने सूचीबद्ध किया गया था और अब इसे 25 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
सवाल में आया विज्ञापन दोनों अखबारों के 12 सितंबर 2026 के संस्करणों के पहले पन्ने पर छपा था (एनेक्जर A-1 और A-2)। इसमें एक उप-शीर्षक था जिसमें पूछा गया, "क्या गुरु जी के खिलाफ कोई साजिश थी?"
जस्टिस सुभाष मेहला ने 16 सितंबर को विज्ञापनों पर ध्यान दिया और अवमानना की कार्यवाही शुरू की थी। नोटिस आज (7 अक्टूबर) के लिए जारी किए गए और रोस्टर के अनुसार मामला डिवीजन बेंच के सामने सूचीबद्ध किया गया।
जस्टिस मेहला ने कहा कि जब अपील और मुकदमे लंबित हों, तब सार्वजनिक अपील और पेड नैरेटिव जारी करके यह संकेत देना कि अदालतें किसी दोषी या आरोपी (इस मामले में गुरमीत राम रहीम सिंह) के खिलाफ साजिश में शामिल हैं, "जनमत को लामबंद करने और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास है जो सीधे तौर पर न्याय प्रशासन में बाधा डालता है।"
प्रथम दृष्टया विचार करने पर अदालत ने माना कि सामग्री में अदालत की "प्रतिष्ठा को कम करने या अधिकार को नीचा दिखाने" और/या न्यायिक कार्यवाही के उचित क्रम में हस्तक्षेप करने या बाधा डालने की प्रवृत्ति हो सकती है। इसने कहा कि आरोपों और लांछनों की जांच 'कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट, 1971', विशेष रूप से धारा 2(c) के तहत की जानी चाहिए।
अदालत ने कहा कि, रिकॉर्ड की अदालत के रूप में उसके पास अनुच्छेद 215 के तहत अपनी अवमानना के लिए दंडित करने की संवैधानिक शक्ति है। इसने कहा कि अधिनियम की धारा 15(1) अदालत को अपनी मर्जी से आपराधिक अवमानना का संज्ञान लेने की अनुमति देती है। पब्लिकेशन की प्रकृति और न्याय-प्रक्रिया में दखल देने की उसकी साफ़ प्रवृत्ति को देखते हुए कोर्ट ने 1971 के एक्ट की धारा 2(c)(i), 2(c)(iii) और 15(1) के साथ पढ़ी जाने वाली धारा 215 के तहत स्वतः संज्ञान लिया।
डेरा सच्चा सौदा (इसके मैनेजमेंट के ज़रिए), 'द हिंदू' के पब्लिशर और एडिटर-इन-चीफ, और 'दैनिक भास्कर' के पब्लिशर और एडिटर-इन-चीफ को नोटिस जारी किया गया।
रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया कि वह नोटिस के साथ एनेक्ज़र (संलग्न दस्तावेजों) की कॉपी भी भेजे। चंडीगढ़ के सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस को निर्देश दिया गया कि वे अवमानना करने वालों की जानकारी तुरंत हासिल करने में रजिस्ट्री की मदद करें।
Title: In Re: Suo motu contempt proceedings against publication of scandalous and contemptuous material intended to scandalize the Court and obstruct the administration of justice