Gurugram School Murder Case| हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई 'चिल्ड्रन्स कोर्ट' से हटाने की मांग वाली CBI की याचिका खारिज की
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि जब कानून के दायरे में आए किसी बच्चे (Juvenile) पर वयस्क की तरह मुकदमा चलाने का निर्देश दिया जाता है तो 'जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015' की धारा 18(3) और धारा 1(4) के तहत, इसकी सुनवाई 'चिल्ड्रन्स कोर्ट' में ही होनी चाहिए। सिर्फ इसलिए कि मामले की जांच CBI ने की है, मुकदमे को CBI के विशेष न्यायाधीश (Special Judge) की अदालत में नहीं भेजा जा सकता।
जस्टिस मनीषा बत्रा ने CBI की याचिका खारिज की, जिसमें 2017 में गुरुग्राम के स्कूल में सात साल के छात्र की हत्या के मामले में आरोपी किशोर (Juvenile) के मुकदमे को स्थानांतरित (Transfer) करने की मांग की गई। CBI चाहती थी कि मुकदमे को गुरुग्राम के 'एडिशनल सेशन जज-कम-चिल्ड्रन्स कोर्ट' से हटाकर पंचकूला में CBI के स्पेशल जज की अदालत में, या फिर पंचकूला के ही किसी 'चिल्ड्रन्स कोर्ट' में भेज दिया जाए।
अदालत ने कहा,
"प्रतिवादी नंबर 2 (Respondent No. 2), जिस पर वयस्क की तरह मुकदमा चलाने का निर्देश दिया गया, उसके मामले की सुनवाई 'जुवेनाइल जस्टिस एक्ट' (JJ Act) की धारा 18(3) और धारा 1(4) के तहत अधिकार क्षेत्र रखने वाले 'चिल्ड्रन्स कोर्ट' में ही होनी चाहिए। यह एक अनिवार्य शर्त है, और CrPC की धारा 407 के तहत मिलने वाली 'मामला स्थानांतरित करने की शक्ति' का इस्तेमाल किसी मुकदमे को पूरी तरह से अलग तरह की अदालत में भेजने के लिए नहीं किया जा सकता।"
8 सितंबर 2017 को गुरुग्राम के स्कूल में दूसरी कक्षा के छात्र प्रिंस (बदला हुआ नाम) की हत्या कर दी गई; उसका शव स्कूल के ग्राउंड फ्लोर पर बने वॉशरूम में मिला था। गुरुग्राम पुलिस ने उसी दिन एक बस कंडक्टर को गिरफ्तार कर लिया था। बाद में उसी महीने, इस मामले की जांच CBI को सौंप दी गई।
नवंबर 2017 में, CBI ने उसी स्कूल के 11वीं कक्षा के छात्र भोलू (बदला हुआ नाम) को पकड़ा। घटना के समय उसकी उम्र 18 साल से कम थी। CBI ने गुरुग्राम की चिल्ड्रेन्स कोर्ट में उसके खिलाफ IPC की धारा 302 के तहत चार्जशीट दाखिल की, और कंडक्टर को मामले से बरी कर दिया गया।
JJ Act की धारा 15 के तहत भोलू के शुरुआती असेसमेंट (मूल्यांकन) को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई चली। 2017 में, जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने निर्देश दिया कि उस पर बालिग की तरह मुकदमा चलाया जाए।
2018 में हाईकोर्ट ने वह आदेश रद्द किया और मामले को नए सिरे से असेसमेंट के लिए वापस भेज दिया। 2022 में 'वरुण चंद्र ठाकुर बनाम मास्टर भोलू' मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को बरकरार रखा। दोबारा असेसमेंट करने पर बोर्ड ने फिर से यही माना कि उस पर एक बालिग की तरह मुकदमा चलना चाहिए। 2023 में हाईकोर्ट ने उसकी चुनौती खारिज की और मुकदमे की कार्यवाही में तेजी लाने का निर्देश दिया।
बता दें, CBI की ट्रांसफर याचिका 2018 में दायर की गई थी। यह याचिका पूरे समय लंबित रही।
Case Title : CBI v. State Of Haryana & Ors.