त्विशा शर्मा हत्या मामला: दहेज हत्या की धारा हटने पर रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को जमानत अर्जी में संशोधन का निर्देश, 8 अक्टूबर को सुनवाई
भोपाल में बहू त्विशा शर्मा की असामान्य मौत से जुड़े मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रिटायर जज गिरिबाला सिंह को अपनी नियमित जमानत अर्जी में संशोधन करने का निर्देश दिया। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सिंह के खिलाफ दहेज हत्या की धारा हटाई और इसके स्थान पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 के तहत लगाया। हाईकोर्ट ने कहा कि बदली हुई धारा के मद्देनजर पहले जमानत अर्जी में संशोधन किया जाए और उसके बाद उस पर दलीलें रखी जाएं। मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी।
जस्टिस अजय कुमार निरंकारी के समक्ष नियमित जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान सिंह के वकील ने अदालत को बताया कि मामले में आरोप की स्थिति बदल गई। उन्होंने कहा कि CBI की ओर से दाखिल आरोपपत्र में धारा 80(2) के तहत दहेज हत्या का आरोप हटा दिया गया और धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप जोड़ा गया। अभियोजन के अनुसार, आवेदक पर मृतका को ताने देने और प्रताड़ित करने के जरिए आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है।
हालांकि, अदालत ने पाया कि सिंह की ओर से दाखिल जमानत अर्जी में यह तथ्य दर्ज नहीं किया गया कि BNS की धारा 80(2) के तहत लगाया गया दहेज हत्या का आरोप अब हटा दिया गया। इस पर अदालत ने सिंह के वकील को जमानत अर्जी में संशोधन करने का निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान जस्टिस निरंकारी ने कहा कि पहले जमानत अर्जी में संशोधन किया जाना चाहिए। उसके बाद बदले हुए आरोप को लेकर दलील रखी जानी चाहिए। अदालत ने आवेदक को संशोधित अर्जी दाखिल करने की अनुमति देते हुए मामले को 8 अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया।अदालत ने वकील से कहा कि संशोधित अर्जी अगले दिन दाखिल कर दें, जिसे अदालत मंजूर कर लेगी और मामले को 8 अक्टूबर को सुनवाई के लिए रखा जाएगा।
यह मामला 33 वर्षीय त्विशा शर्मा की मौत से जुड़ा है। ट्विशा 12 मई को भोपाल स्थित अपने ससुराल में मृत पाई गईं। उनकी मौत के बाद शुरुआती तौर पर BNS की धारा 80(2), धारा 85 और धारा 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया। इसके अलावा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धाराएं 3 और 4 भी लगाई गईं। शुरुआती मामले में धारा 80(2) दहेज हत्या से संबंधित थी।
बाद में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद मामले की जांच CBI को सौंप दी गई। जांच पूरी करने के बाद CBI ने आरोपपत्र दाखिल किया, जिसमें गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज हत्या की धारा 80(2) को हटा दिया गया और आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित धारा 108 जोड़ी गई।
इससे पहले हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान CBI को सिंह की जमानत अर्जी पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया गया। अब आरोपपत्र में आरोप की स्थिति बदलने के बाद अदालत ने जमानत अर्जी में भी उसी के अनुरूप संशोधन करने को कहा।
गिरिबाला सिंह सेवानिवृत्त जज हैं। उन्हें इससे पहले 15 मई को भोपाल की निचली अदालत ने अग्रिम जमानत दी थी। इसके खिलाफ राज्य सरकार और मृतका के माता-पिता ने हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट ने 27 मई को उनकी अग्रिम जमानत रद्द की थी। इसके बाद सिंह हिरासत में रहीं और भोपाल की अदालत ने बाद की सुनवाइयों में उनकी न्यायिक हिरासत 30 जून और फिर 14 जुलाई को बढ़ाई थी।
नियमित जमानत के लिए दाखिल अपनी अर्जी में सिंह ने दावा किया कि त्विशा अवसाद से पीड़ित थीं और दहेज से जुड़े आरोप झूठे हैं। जमानत अर्जी में यह भी कहा गया कि ऐसा कोई लेनदेन सामने नहीं आया, जिससे यह साबित हो कि सिंह ने मृतका के माता-पिता से कोई रकम ली थी। इसके विपरीत, अर्जी में दावा किया गया कि उनके बेटे ने ही त्विशा के खातों में 7.5 लाख रुपये स्थानांतरित किए।
मृतका के पिता ने सिंह को नियमित जमानत दिए जाने का विरोध किया।
अब हाईकोर्ट में 8 अक्टूबर को संशोधित जमानत अर्जी के आधार पर मामले की सुनवाई होगी।