एमपी हाईकोर्ट का आदेश: अगर पिता दोबारा शादी करता है या लिव-इन रिलेशनशिप में जाता है तो बेटी की कस्टडी माँ को सौंपनी होगी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने चार साल की बच्ची की कस्टडी उसके पिता को तब तक के लिए दी है, जब तक कि वे दोबारा शादी नहीं कर लेते या लिव-इन रिलेशनशिप में नहीं चले जाते। [2026 LiveLaw (MP) 408]
यह देखते हुए कि बच्ची की माँ (पत्नी) किसी दूसरे व्यक्ति के साथ रह रही है और अपने पति के पास वापस नहीं लौटना चाहती, चीफ जस्टिस अल्पेश वाई. कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की बेंच ने पिता को कस्टडी देना सही समझा।
हालांकि, पति के दोबारा शादी करने की संभावना को देखते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया:
"अगर याचिकाकर्ता दोबारा शादी करता है या लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है तो उसके लिए बच्ची (RK) की कस्टडी माँ (SK) को सौंपना ज़रूरी होगा।"
एक व्यक्ति ने याचिका दायर की थी जिसमें 6 फरवरी, 2026 को गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस की कार्रवाई की जांच से जुड़े सभी रिकॉर्ड मँगवाने की मांग की गई। याचिका में याचिकाकर्ता की पत्नी एसके को खोजने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी।
25 सितंबर, 2026 के कोर्ट के आदेश के बाद एसके और उसकी बेटी आरके को ढूंढ लिया गया और कोर्ट के सामने पेश किया गया। पता चला कि एसके, बच्ची आरके के साथ इटावा, यूपी में किसी दूसरे व्यक्ति के साथ रह रही थी। एसके की उम्र 25 साल और बच्ची की उम्र लगभग साढ़े चार साल बताई गई।
यह बच्ची याचिकाकर्ता और एसके की शादी से हुई थी। कोर्ट ने एसके से बात की और पाया कि वह उस दूसरे व्यक्ति के साथ रहना चाहती है, क्योंकि याचिकाकर्ता के साथ उसके वैवाहिक मतभेद थे।
यह देखते हुए कि एसके उस दूसरे व्यक्ति के साथ रहना चाहती थी, कोर्ट ने बच्ची आरके की कस्टडी याचिकाकर्ता को सौंपना सही समझा। हालाँकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह एसके को बच्ची से मिलने की पूरी सुविधा दे। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि बच्ची को हर दो महीने में एक बार, एक हफ़्ते के लिए एसके के पास भेजा जाए।
Case Title : SK v State of MP