धारा 19 राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001: अपीलीय किराया न्यायाधिकरण और लंबित मामलों में किराया भुगतान– भाग 2

Update: 2025-04-03 14:21 GMT
धारा 19 राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001: अपीलीय किराया न्यायाधिकरण और लंबित मामलों में किराया भुगतान– भाग 2

राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 (Rajasthan Rent Control Act, 2001) का उद्देश्य किरायेदार (Tenant) और मकान मालिक (Landlord) के बीच विवादों का त्वरित और न्यायसंगत निपटारा करना है। इस अधिनियम के तहत, किराया न्यायाधिकरण (Rent Tribunal) और अपीलीय किराया न्यायाधिकरण (Appellate Rent Tribunal) स्थापित किए गए हैं, ताकि किरायेदारी से जुड़े मामलों को सुलझाया जा सके।

धारा 19 (Section 19) और धारा 19-A (Section 19-A) इस प्रक्रिया का विस्तार करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि किराया विवादों का न्यायिक समाधान प्रभावी रूप से किया जाए। धारा 19 न्यायाधिकरणों के गठन, अपील और उसकी समय सीमा से संबंधित है, जबकि धारा 19-A लंबित याचिकाओं (Pending Petitions) या अपील (Appeals) के दौरान किराए के भुगतान (Payment of Rent) को नियंत्रित करती है।

अपीलीय किराया न्यायाधिकरण (Appellate Rent Tribunal) और अपील प्रक्रिया (Appeal Process) – धारा 19 (Section 19)

राज्य सरकार द्वारा अपीलीय किराया न्यायाधिकरण का गठन (Establishment of Appellate Rent Tribunal - Section 19(1))

राज्य सरकार आवश्यकतानुसार कई अपीलीय किराया न्यायाधिकरण (Appellate Rent Tribunals) स्थापित कर सकती है। इन न्यायाधिकरणों की स्थापना आधिकारिक गजट (Official Gazette) में अधिसूचना (Notification) जारी करके की जाएगी।

उदाहरण:

यदि जयपुर, जोधपुर और उदयपुर जैसे प्रमुख शहरों में किराया संबंधी विवाद अधिक संख्या में आते हैं, तो सरकार इन शहरों में अलग-अलग अपीलीय किराया न्यायाधिकरण बना सकती है, जिससे विवादों का शीघ्र निपटारा हो सके।

विभिन्न न्यायाधिकरणों में कार्य विभाजन (Distribution of Work - Section 19(2))

यदि किसी क्षेत्र में दो या अधिक अपीलीय किराया न्यायाधिकरण स्थापित किए जाते हैं, तो राज्य सरकार यह तय कर सकती है कि कौन सा न्यायाधिकरण किस प्रकार के मामलों की सुनवाई करेगा।

उदाहरण:

• एक अपीलीय न्यायाधिकरण केवल किराए की वसूली (Recovery of Rent) के मामलों की सुनवाई करेगा।

• दूसरा अपीलीय न्यायाधिकरण बेदखली (Eviction) या अन्य संबंधित विवादों की सुनवाई करेगा।

पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer) की नियुक्ति (Appointment of Presiding Officer - Section 19(3) & 19(4))

प्रत्येक अपीलीय किराया न्यायाधिकरण में केवल एक पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer) होगा, जिसे हाईकोर्ट (High Court) द्वारा नियुक्त किया जाएगा।

योग्यता (Eligibility for Appointment - Section 19(4)):

• व्यक्ति को जिला न्यायाधीश संवर्ग (District Judge Cadre) का सदस्य होना चाहिए।

• उसे कम से कम तीन वर्षों (Three Years) का अनुभव होना आवश्यक है।

एक अधिकारी का दो न्यायाधिकरणों में कार्य करना (One Officer Handling Two Tribunals - Section 19(5))

अगर किसी क्षेत्र में एक अपीलीय न्यायाधिकरण का अधिकारी अनुपलब्ध है, तो हाईकोर्ट किसी अन्य न्यायाधिकरण के अधिकारी को दोनों जगहों पर कार्य करने की अनुमति दे सकता है।

अपील की प्रक्रिया और समय सीमा (Appeal Process & Limitation - Section 19(6))

• किराया न्यायाधिकरण (Rent Tribunal) के अंतिम आदेश (Final Order) के खिलाफ अपील की जा सकती है।

• यह अपील उसी क्षेत्र के अपीलीय किराया न्यायाधिकरण (Appellate Rent Tribunal) में की जाएगी।

• अपील दायर करने की अधिकतम समय सीमा 60 दिन (Sixty Days) होगी।

नोट:

अगर अपील निर्धारित समय के बाद की जाती है, तो अपीलकर्ता (Appellant) को विलंब के लिए उपयुक्त कारण (Sufficient Cause) प्रस्तुत करना होगा।

धारा 19-A: लंबित याचिका (Pending Petition) या अपील (Appeal) के दौरान किराया भुगतान (Payment of Rent During Pendency of Case)

मकान मालिक (Landlord) द्वारा आवेदन (Application by Landlord - Section 19-A)

धारा 19-A यह प्रावधान करता है कि यदि किसी मामले की सुनवाई न्यायाधिकरण (Tribunal) में लंबित है, तो मकान मालिक न्यायाधिकरण से यह अनुरोध कर सकता है कि किरायेदार को बकाया किराया (Arrears of Rent) और भविष्य का किराया (Future Rent) भुगतान करने का आदेश दिया जाए।

न्यायाधिकरण का आदेश (Tribunal's Order - Section 19-A)

जब मकान मालिक किराए के भुगतान के लिए आवेदन करता है, तो न्यायाधिकरण:

1. दोनों पक्षों (Both Parties) को सुनवाई का अवसर देगा।

2. सुनवाई के बाद, न्यायाधिकरण किरायेदार को आदेश देगा कि:

o वह सारा बकाया किराया तुरंत चुकाए (Pay All Due Rent Immediately)।

o वह मामले के लंबित रहने तक नियमित रूप से किराया भुगतान करता रहे (Continue to Pay Rent Regularly During the Pendency of Case)।

धारा 19-A का उद्देश्य (Purpose of Section 19-A)

• यह सुनिश्चित करना कि मकान मालिक को आर्थिक नुकसान न हो।

• किरायेदार न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग न कर सके और जानबूझकर किराए का भुगतान न रोके।

उदाहरण:

यदि किसी मकान मालिक ने किरायेदार के खिलाफ बेदखली (Eviction) का मुकदमा दायर किया है, और मामला न्यायाधिकरण में लंबित है, तो इस धारा के तहत मकान मालिक यह मांग कर सकता है कि जब तक फैसला नहीं आता, तब तक किरायेदार नियमित रूप से किराया चुकाता रहे।

धारा 19 और 19-A के बीच अंतर (Difference Between Section 19 & 19-A)

धारा 19 (Section 19) धारा 19-A (Section 19-A)

अपीलीय किराया न्यायाधिकरण (Appellate Rent Tribunal) की स्थापना, कार्य, और अपील की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। यह सुनिश्चित करता है कि लंबित मामलों (Pending Cases) के दौरान किरायेदार मकान मालिक को किराया देता रहे।

अपील (Appeal) दायर करने की प्रक्रिया और समय सीमा (60 दिन) निर्धारित करता है। मकान मालिक को किराया वसूलने का अधिकार देता है, भले ही मामला अभी लंबित हो।

हाईकोर्ट को यह अधिकार देता है कि वह पीठासीन अधिकारी को नियुक्त करे और आवश्यकतानुसार किसी अधिकारी को एक से अधिक न्यायाधिकरणों का कार्यभार सौंपे। न्यायाधिकरण को यह शक्ति देता है कि वह किराया भुगतान का आदेश पारित करे, ताकि मकान मालिक को वित्तीय नुकसान न हो।

धारा 19 और 19-A किराया विवादों की न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करते हैं।

• धारा 19 न्यायाधिकरणों के गठन, अपील की प्रक्रिया और अधिकारियों की नियुक्ति को नियंत्रित करती है।

• धारा 19-A यह सुनिश्चित करता है कि न्यायिक कार्यवाही के दौरान भी मकान मालिक को किराए का भुगतान मिलता रहे।

इससे किरायेदारी विवादों का समाधान तेजी से और निष्पक्ष रूप से हो सकता है, और दोनों पक्षों के अधिकारों की सुरक्षा होती है।

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