राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001: अपीलीय किराया न्यायाधिकरण, अपीलऔर उनकी सीमाएं – भाग 1 धारा 19

राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 (Rajasthan Rent Control Act, 2001) के तहत, किराया न्यायाधिकरण (Rent Tribunal) के निर्णयों के विरुद्ध अपील (Appeal) करने के लिए अपीलीय किराया न्यायाधिकरण (Appellate Rent Tribunal) का प्रावधान किया गया है। धारा 19 (धारा 19) यह निर्धारित करता है कि राज्य सरकार (State Government) आवश्यकतानुसार अपीलीय न्यायाधिकरणों का गठन करेगी, उनके अधिकार क्षेत्र को निर्धारित करेगी, और उनकी कार्यवाही से संबंधित नियम बनाएगी।
अपीलीय किराया न्यायाधिकरण का गठन (Constitution of Appellate Rent Tribunal - धारा 19(1))
राज्य सरकार यह तय करेगी कि कितने अपीलीय किराया न्यायाधिकरण (Appellate Rent Tribunals) बनाए जाएं और उन्हें कहां स्थापित किया जाए। इसके लिए, सरकार को आधिकारिक गजट (Official Gazette) में एक अधिसूचना (Notification) जारी करनी होगी।
उदाहरण:
अगर जयपुर, जोधपुर और कोटा में किराया न्यायाधिकरण (Rent Tribunals) कार्यरत हैं, तो सरकार इन तीनों शहरों में अपीलीय किराया न्यायाधिकरण स्थापित कर सकती है, ताकि किरायेदारी से जुड़े अपील मामलों का निपटारा शीघ्रता से किया जा सके।
अनेक अपीलीय न्यायाधिकरणों में कार्य विभाजन (Distribution of Work Among Tribunals - धारा 19(2))
यदि किसी क्षेत्र में दो या अधिक अपीलीय किराया न्यायाधिकरण बनाए जाते हैं, तो राज्य सरकार सामान्य या विशेष आदेश (General or Special Order) द्वारा यह तय कर सकती है कि कौन सा न्यायाधिकरण कौन से मामलों की सुनवाई करेगा।
उदाहरण:
अगर उदयपुर में दो अपीलीय किराया न्यायाधिकरण हैं, तो सरकार यह निर्धारित कर सकती है कि एक न्यायाधिकरण केवल किराये की वसूली (Recovery of Rent) के मामलों की सुनवाई करेगा और दूसरा न्यायाधिकरण केवल बेदखली (Eviction) के मामलों की सुनवाई करेगा।
अपीलीय किराया न्यायाधिकरण का गठन और पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer) की नियुक्ति (Appointment of Presiding Officer - धारा 19(3))
प्रत्येक अपीलीय किराया न्यायाधिकरण में केवल एक व्यक्ति (Single Member) होगा, जिसे पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer) कहा जाएगा। इस अधिकारी की नियुक्ति उच्च न्यायालय (High Court) द्वारा की जाएगी।
इसका अर्थ यह हुआ कि:
• अपीलीय न्यायाधिकरण में किसी पीठ का गठन (Bench Formation) नहीं होगा।
• केवल एक न्यायाधीश (Single Judge) ही मामलों की सुनवाई करेगा और अंतिम निर्णय देगा।
पीठासीन अधिकारी के लिए योग्यता (Eligibility Criteria for Presiding Officer - धारा 19(4))
धारा 19(4) के अनुसार, अपीलीय किराया न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी बनने के लिए व्यक्ति को जिला न्यायाधीश संवर्ग सेवा (District Judge Cadre Service) का सदस्य होना चाहिए और उसे कम से कम तीन वर्षों (Three Years) का अनुभव होना आवश्यक है।
इस प्रावधान का उद्देश्य:
• न्यायिक अधिकारियों को अनुभव के आधार पर नियुक्त करना।
• सुनवाई की निष्पक्षता और कुशलता सुनिश्चित करना।
• अपीलीय किराया न्यायाधिकरण में न्यायिक मानकों को बनाए रखना।
एक अधिकारी का दो न्यायाधिकरणों में कार्य करना (One Officer Handling Two Tribunals - धारा 19(5))
उच्च न्यायालय (High Court) को यह अधिकार होगा कि वह एक अपीलीय किराया न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी को अन्य किसी अपीलीय किराया न्यायाधिकरण के कार्यों का निर्वहन करने के लिए अधिकृत कर सके।
उदाहरण:
अगर जयपुर और अजमेर में अलग-अलग अपीलीय किराया न्यायाधिकरण हैं, लेकिन अजमेर में कोई पीठासीन अधिकारी उपलब्ध नहीं है, तो उच्च न्यायालय जयपुर के अपीलीय न्यायाधिकरण के अधिकारी को अजमेर में भी मामलों की सुनवाई करने की अनुमति दे सकता है।
अपील करने का अधिकार और समय सीमा (Right to Appeal & Limitation Period - धारा 19(6))
यदि किसी व्यक्ति को किराया न्यायाधिकरण (Rent Tribunal) के अंतिम निर्णय (Final Order) से असहमति है, तो वह उसी क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) में स्थित अपीलीय किराया न्यायाधिकरण (Appellate Rent Tribunal) में अपील दायर कर सकता है।
अपील करने की समय सीमा 60 दिन (Sixty Days) होगी। इसका मतलब है कि अंतिम आदेश पारित होने की तारीख से 60 दिनों के भीतर अपील दायर करनी होगी।
महत्वपूर्ण बिंदु:
• अपील केवल अंतिम आदेश (Final Order) के विरुद्ध की जा सकती है।
• अपील दायर करने के लिए किराया न्यायाधिकरण के अंतिम आदेश की प्रमाणित प्रति (Certified Copy of the Final Order) प्रस्तुत करनी होगी।
• यदि अपील 60 दिनों की समय सीमा के बाद दायर की जाती है, तो अपील स्वीकृत होने की संभावना कम हो सकती है, जब तक कि विलंब के लिए उचित कारण (Sufficient Cause) नहीं दिया जाता।
धारा 19 राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 के तहत अपीलीय किराया न्यायाधिकरण की संरचना (Structure), अधिकार (Powers) और अपील प्रक्रिया (Appeal Procedure) को नियंत्रित करता है।
इस प्रावधान के प्रमुख बिंदु हैं:
• राज्य सरकार आवश्यकता के अनुसार कई अपीलीय किराया न्यायाधिकरण स्थापित कर सकती है।
• यदि एक क्षेत्र में एक से अधिक अपीलीय न्यायाधिकरण हों, तो सरकार उनके बीच मामलों का बंटवारा कर सकती है।
• प्रत्येक अपीलीय न्यायाधिकरण में केवल एक पीठासीन अधिकारी होगा, जिसकी नियुक्ति उच्च न्यायालय द्वारा की जाएगी।
• अधिकारी को जिला न्यायाधीश संवर्ग सेवा (District Judge Cadre) का सदस्य होना चाहिए और उसे कम से कम तीन वर्षों का अनुभव होना आवश्यक है।
• उच्च न्यायालय, आवश्यकता पड़ने पर, एक अधिकारी को एक से अधिक न्यायाधिकरणों के मामलों की सुनवाई का अधिकार दे सकता है।
• किराया न्यायाधिकरण के अंतिम आदेश के खिलाफ 60 दिनों के भीतर अपीलीय किराया न्यायाधिकरण में अपील दायर की जा सकती है।
यह प्रावधान यह सुनिश्चित करता है कि किरायेदारी से जुड़े विवादों की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) प्रभावी, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो, जिससे सभी पक्षों को उचित न्याय मिल सके।
अगले भाग में धारा 19 के अन्य प्रावधानों की चर्चा की जाएगी।