कर्नाटक हाईकोर्ट का अहम फैसला: मनी लॉन्ड्रिंग के कथित अपराध से पहले खरीदी गई संपत्ति भी हो सकती है कुर्क
कर्नाटक हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया कि कथित अनुसूचित अपराध से कई साल पहले खरीदी गई संपत्ति को केवल खरीद की तारीख के आधार पर धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अस्थायी कुर्की से छूट नहीं दी जा सकती। यदि कानून में निर्धारित शर्तें पूरी होती हैं, तो अपराध से प्राप्त धन के बराबर मूल्य की दूसरी संपत्ति भी कुर्क की जा सकती है।
जस्टिस सूरज गोविंदराज ने कहा कि PMLA की धारा 2(1)(u) को धारा 5 के साथ पढ़ने पर अपराध से प्राप्त धन के बराबर मूल्य की संपत्ति कुर्क करने का अधिकार मिलता है। इसके लिए यह जरूरी नहीं है कि अपराध से प्राप्त मूल संपत्ति विदेश में रखी गई हो।
हाईकोर्ट ने शंकर महादेवन अय्यर की ओर से दाखिल याचिका खारिज करते हुए कहा कि वर्ष 2004 और 2008 में खरीदी गई संपत्तियों को भी बराबर मूल्य की संपत्ति के रूप में कुर्क किया जा सकता है, बशर्ते अधिनियम की आवश्यक शर्तें पूरी हों।
याचिकाकर्ता की दलील थी कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) उसकी संपत्तियों को कुर्क नहीं कर सकता, क्योंकि ये संपत्तियां वर्ष 2004 और 2008 में खरीदी गई थीं, जबकि कथित लेनदेन वर्ष 2011-2012 के हैं। उसने यह भी तर्क दिया कि बराबर मूल्य की संपत्ति कुर्क करने का प्रावधान केवल उन मामलों में लागू होता है, जहां अपराध से प्राप्त मूल संपत्ति विदेश में रखी गई हो।
इस पर हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले विजय मदनलाल चौधरी बनाम भारत संघ और एक्सिस बैंक के निर्णय का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से की गई कानूनी व्याख्या का पालन करना बाध्यकारी है। इसलिए विदेश में अपराध से प्राप्त संपत्ति मौजूद न होने का तथ्य अपने आप में भारत में मौजूद बराबर मूल्य की दूसरी संपत्ति की कुर्की को नहीं रोकता।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह नहीं है कि आरोपी की कोई भी संपत्ति बिना कानूनी शर्तें पूरी किए कुर्क की जा सकती है। बराबर मूल्य की संपत्ति कुर्क करने का कानूनी आधार और इसके लिए जरूरी परिस्थितियां स्थापित करना अनिवार्य है।
हाईकोर्ट ने माना कि वर्ष 2004 और 2008 में खरीदी गई संपत्तियां वर्ष 2011-2012 में हुई कथित आपराधिक गतिविधियों से सीधे प्राप्त नहीं हो सकती थीं। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि बराबर मूल्य की संपत्ति कुर्क करने के कानूनी प्रावधान के तहत केवल संपत्ति की खरीद की तारीख से कुर्की अवैध नहीं हो जाती।
कोर्ट ने कहा कि मूल अपराध से प्राप्त धन उपलब्ध नहीं है या नहीं, याचिकाकर्ता को प्राप्त हुई रकम अपराध से प्राप्त धन की श्रेणी में आती है या नहीं और कुर्की के लिए कानून की अन्य शर्तें पूरी हुई हैं या नहीं, इन सभी तथ्यों का निर्णय साक्ष्यों के आधार पर निर्णायक प्राधिकरण को करना होगा। इसके बाद कानून में उपलब्ध उपायों के तहत अपीलीय न्यायाधिकरण में भी मामला उठाया जा सकता है।
इस मामले में हाईकोर्ट ने सतीश मोटीलाल बिद्री के फैसले की उस व्याख्या को स्वीकार नहीं किया, जिसमें बराबर मूल्य की संपत्ति की कुर्की को केवल उन मामलों तक सीमित माना गया था, जहां मूल अपराध से प्राप्त संपत्ति विदेश में ले जाई गई हो या वहां रखी गई हो।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि PMLA की धारा 5(1) के तहत अस्थायी कुर्की से पहले संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का नोटिस देने का कोई अनिवार्य प्रावधान नहीं है।
कोर्ट के अनुसार, कानून में इसके बजाय बाद की प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा उपाय दिए गए। कुर्की का आदेश और उससे संबंधित सामग्री निर्णायक प्राधिकरण को भेजी जाती है। निर्धारित समय के भीतर शिकायत दाखिल करनी होती है और धारा 8 के तहत कार्यवाही के दौरान प्रभावित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है।
कोर्ट ने कहा,
"अस्थायी कुर्की की प्रकृति, कानून में निर्धारित समय-सीमा और उसके बाद होने वाली निर्णय प्रक्रिया महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय हैं। धारा 5(1) में पहले से सुनवाई का अवसर देने की अनिवार्यता जोड़ने का कोई आधार नहीं है।"
अदालत ने यह भी पाया कि ED ने धारा 5(1) के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया। कुर्की आदेश में न तो विवेक का इस्तेमाल नहीं करने की कोई खामी मिली और न ही कुर्क की गई संपत्तियों तथा कथित अपराध से प्राप्त धन के बीच संबंध के अभाव का आधार सामने आया।
यह विवाद उडुपी के अतिरिक्त सिविल जज एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज एक निजी शिकायत से शुरू हुआ था। इस मामले में आरोपपत्र दाखिल किया गया, जिसमें याचिकाकर्ता को तीसरा आरोपी बनाया गया।
मामला हनुमान मिनरल्स और मणिपाल ग्लोबल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के बीच लौह अयस्क की आपूर्ति को लेकर हुए व्यावसायिक विवाद से जुड़ा था। इसी के आधार पर ED ने वर्ष 2022 में प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट दर्ज की और 29 अक्टूबर 2024 को याचिकाकर्ता की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया।
याचिकाकर्ता का कहना था कि वह कथित लेनदेन में माल जहाज पर चढ़ाने का काम करने वाले व्यक्ति के रूप में शामिल था। उसने यह भी दावा किया कि हनुमान मिनरल्स से प्राप्त रकम वर्ष 2011 में लौह अयस्क खरीदने के लिए उसके द्वारा पहले दी गई अग्रिम राशि की आंशिक वापसी थी।
हालांकि, हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की और स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के पास PMLA के तहत उपलब्ध अन्य वैधानिक उपाय खुले रहेंगे। अदालत ने यह भी साफ किया कि संपत्तियों की कुर्की की अंतिम वैधता और उसके लिए जरूरी तथ्यात्मक शर्तों पर निर्णायक प्राधिकरण साक्ष्यों के आधार पर फैसला करेगा।