प्रथम दृष्टया भ्रष्टाचार: स्टूडेंट्स के रजिस्ट्रेशन न होने पर झारखंड हाइकोर्ट ने JUT-AICTE के खिलाफ CBI जांच के आदेश दिए
झारखंड हाइकोर्ट ने झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (JUT) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए CBI जांच के आदेश दिए। कोर्ट ने तकनीकी स्टूडेंट के पंजीकरण से जुड़े मामले में टिप्पणी की कि यह मामला प्रथम दृष्टया राज्य अधिकारियों द्वारा अपनाए गए भ्रष्ट आचरण को दर्शाता है, जिसने स्टूडेंट्स के भविष्य को संकट में डाल दिया।
जस्टिस राजेश कुमार ने धनबाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
सुनवाई के दौरान हाइकोर्ट ने अधिकारियों के व्यवहार की तुलना उन ट्रैफिक पुलिसकर्मियों से की जो केवल लोगों को फंसाने और जुर्माना वसूलने के लिए 'नो एंट्री' या 'नो पार्किंग' के बोर्ड हटा देते हैं। कोर्ट ने दर्ज किया कि जेयूटी ने इस मामले में इसी तरह का रवैया अपनाया है। AICTE ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए संस्थान को मंजूरी दी, जिसके आधार पर स्टूडेंट्स ने एडमिशन लिया और अपनी पढ़ाई शुरू की।
इसके बावजूद JUT ने न तो संबद्धता प्रदान की और न ही इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग शाखा के 60 स्टूडेंट्स का रजिस्ट्रेशन पूरा किया। अदालत ने कहा कि स्टूडेंट प्रभावी रूप से उस "जाल" में फंस गए हैं, जहां उनके पास वैध प्रवेश तो है लेकिन परीक्षा देने का अधिकार नहीं है।
हाइकोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को इस बात की तहकीकात करने का निर्देश दिया कि स्टूडेंट को AICTE और जेयूटी द्वारा कथित तौर पर किस तरह फंसाया गया और इस पूरी प्रक्रिया में किसकी क्या भूमिका रही।
जस्टिस राजेश कुमार ने विशेष रूप से दो बिंदुओं पर जांच के आदेश दिए: पहला स्टूडेंट को इन संस्थाओं द्वारा कैसे जाल में फंसाया गया और दूसरा इस साजिश में किन अधिकारियों या व्यक्तियों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
अदालत ने CBI को अपनी जांच रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर सीलबंद लिफाफे में पेश करने को कहा है। साथ ही JUT और AICTE दोनों को जांच में पूर्ण सहयोग करने का सख्त निर्देश दिया गया। कोर्ट ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि प्रशासनिक लापरवाही या भ्रष्टाचार के कारण छात्रों का पूरा साल और करियर बर्बाद होने की कगार पर है।
इस मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी, 2026 को तय की गई।