हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि किसी दोषी का नेपाली नागरिक होना अपने आप में उसे पैरोल देने से इनकार करने का आधार नहीं हो सकता। यदि दोषी का परिवार कई दशकों से भारत में रह रहा है, यहां उसके स्थायी सामाजिक और पारिवारिक संबंध हैं तथा जेल में उसका आचरण संतोषजनक रहा है तो केवल इस आशंका के आधार पर पैरोल नहीं रोकी जा सकती कि वह नेपाल भाग सकता है।

जस्टिस राकेश कैंथला ने विक्की राणा की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि जब याचिकाकर्ता के परिवार के सदस्य 30-35 वर्षों से नैनीताल में रह रहे हैं, तो केवल उसके नेपाली नागरिक होने के आधार पर पैरोल आवेदन खारिज नहीं किया जा सकता।

विक्की राणा हिमाचल प्रदेश के बग्गा थाने में दर्ज वर्ष 2013 की FIR संख्या 10 के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है। उसने 23 जून 2026 के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसके जरिए उसकी पैरोल की अर्जी खारिज कर दी गई। उसने परिवार से मिलने के लिए अस्थायी रिहाई की मांग की थी। उसका परिवार लंबे समय से उत्तराखंड के नैनीताल में रह रहा है।

राज्य सरकार ने पैरोल का विरोध करते हुए कहा था कि याचिकाकर्ता नेपाल का नागरिक है और गंभीर अपराध में दोषी ठहराया जा चुका है। उसे रिहा किए जाने पर नेपाल भाग जाने की आशंका है। इसके जवाब में याचिकाकर्ता ने बताया कि उसके माता-पिता ने नैनीताल में मकान बनाया है और वहां संपत्ति भी खरीदी है। जेल में उसका आचरण भी संतोषजनक रहा है।

हाईकोर्ट ने पैरोल खारिज करने वाला आदेश रद्द किया। कोर्ट ने अपने पूर्व के फैसले अर्जुन बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य का हवाला देते हुए कहा कि पैरोल केवल उन वैधानिक आधारों पर रोकी जा सकती है, जिनमें कैदी की रिहाई से राज्य की सुरक्षा को खतरा होने या सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका हो।

कोर्ट ने पैरोल के सुधारात्मक और पुनर्वास संबंधी उद्देश्य पर भी जोर दिया। सुप्रीम कोर्ट के असफाक बनाम राजस्थान राज्य के फैसले का उल्लेख करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि पैरोल का उद्देश्य कैदी को अपने परिवार और सामाजिक संबंध बनाए रखने का अवसर देना तथा उसके पुनर्वास में मदद करना है।

याचिकाकर्ता के जेल रिकॉर्ड में भी उसके आचरण और व्यवहार को संतोषजनक बताया गया। हाईकोर्ट ने पाया कि नेपाल भागने की आशंका जताने के लिए अधिकारियों ने जिन परिस्थितियों पर भरोसा किया, वे पर्याप्त नहीं थीं। रिकॉर्ड से पता चला कि याचिकाकर्ता का परिवार 30-35 वर्षों से नैनीताल में रह रहा है। वहां उसका परिवार मकान और संपत्ति रखता है तथा उसकी पत्नी, नाबालिग बेटी, पिता और अन्य रिश्तेदार भारत में रह रहे हैं।

कोर्ट ने यह भी कहा कि हिमाचल प्रदेश में परिवार के संबंध नहीं होने के आधार पर पुराने पैरोल आदेशों में की गई टिप्पणियों को वर्तमान मामले में यांत्रिक तरीके से लागू नहीं किया जा सकता।

इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने विक्की राणा को चार सप्ताह के लिए पैरोल पर रिहा करने का निर्देश दिया। रिहाई के लिए उसे एक लाख रुपये का निजी मुचलका और इसी राशि के दो जमानती मुचलके देने होंगे। साथ ही उसे अच्छे आचरण का आश्वासन देना होगा और पैरोल की अवधि समाप्त होने पर तय समय पर जेल में आत्मसमर्पण करना होगा।

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