छात्रा से यौन संबंध की मांग के आरोपी प्रोफेसर को राहत नहीं, गुजरात हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज की
गुजरात हाईकोर्ट ने कॉलेज प्रोफेसर की जमानत याचिका खारिज की, जिस पर अपनी ही छात्रा से यौन संबंध बनाने का दबाव डालने और आपत्तिजनक संदेश भेजने के गंभीर आरोप हैं। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य प्रथम दृष्टया आरोपों का समर्थन करते हैं।
जस्टिस निखिल एस. करियल ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी द्वारा यौन कृपा की मांग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए, जो अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं।
अदालत ने चार्जशीट, पीड़िता के बयान और अन्य दस्तावेजों का अवलोकन करते हुए जमानत देने से इनकार किया।
अदालत ने विशेष रूप से उस माफी पत्र का उल्लेख किया, जो आरोपी ने अपनी गिरफ्तारी से एक दिन पहले कॉलेज प्राचार्य को लिखा था। इसमें उसने अपने अनुचित व्यवहार और छात्राओं के साथ आपत्तिजनक चैट के लिए खेद जताया था।
कोर्ट ने यह भी पाया कि रिकॉर्ड में मौजूद व्हाट्सऐप चैट से स्पष्ट होता है कि आरोपी ने छात्रा पर अपने रूम में आने और संबंध बनाने का दबाव डाला। एक अन्य छात्रा के साथ भी इसी तरह का व्यवहार सामने आया जहां उसने आरोपी का नंबर ब्लॉक कर दिया था।
पीड़िता के बयान का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि उसने अपने आरोपों पर कायम रहते हुए बताया कि आरोपी ने उससे अनुचित स्पर्श भी किया।
हालांकि, बचाव पक्ष ने यह दलील दी कि शिकायतकर्ता आंशिक रूप से अपने बयान से मुकर गई लेकिन अदालत ने माना कि ऐसा पूरी तरह नहीं है।
अदालत ने यह भी कहा कि मामला अभी विचाराधीन है और सुनवाई तेजी से आगे बढ़ रही है, इसलिए इस स्तर पर हस्तक्षेप उचित नहीं होगा।
इन सभी तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सामग्री मौजूद है। ऐसे में उसे जमानत देना उचित नहीं होगा।